विरूर स्टेशन की जमीन पर घमासान, वैध खरीदी को विवाद बताकर माहौल गरमाने की कोशिश
चंद्रपुर महाराष्ट्र
रिपोर्टर:- रमाकांत यादव रिड पब्लिक न्यूज़ भारत
दिनांक:- १० फरवरी २०२६
पूरी खबर:-विरूर स्टेशन क्षेत्र के सर्वे क्रमांक 378 और 478 की जमीन को लेकर इन दिनों ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, मानो कोई बड़ा घोटाला सामने आ गया हो। लेकिन जमीन के वैध धारक अजय रेड्डी ने सामने आकर साफ शब्दों में कहा है कि यह पूरा प्रकरण भ्रम, आधी-अधूरी जानकारी और जानबूझकर फैलाए गए संदेह का नतीजा है।
अजय रेड्डी ने स्पष्ट किया है कि नगर भूमापन क्रमांक 378 के अंतर्गत आने वाली जमीन उन्होंने वर्ष 2013 में श्री अजित सिंह संतोष सिंह से पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया अपनाकर खरीदी थी। रजिस्ट्री, राजस्व रिकॉर्ड और सभी अधिकृत दस्तावेज इस बात की पुष्टि करते हैं। इसके बावजूद दशकों पुराने रिकॉर्ड, जो वर्ष 1979–80 के बताए जा रहे हैं, उन्हें अचानक सामने लाकर मौजूदा वैध खरीदी पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
अजय रेड्डी का कहना है कि पुराने जमाने के अभिलेख और वर्तमान कानूनी व्यवहार को जबरन जोड़कर झूठा नैरेटिव तैयार किया जा रहा है, ताकि जमीन को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा सके। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर जमीन को लेकर कोई आपत्ति थी, तो वह वर्षों तक चुप क्यों रही और अब अचानक ही मामला क्यों गरमाया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अजय रेड्डी के खिलाफ लगातार भ्रामक बातें फैलाने और उनकी सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने इस संबंध में संबंधित थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने न आना प्रशासनिक भूमिका पर भी सवाल खड़े करता है।
अजय रेड्डी ने यह भी बताया कि यह पहली बार नहीं है जब उनके नाम को इस तरह विवाद में घसीटा गया हो। पूर्व में भी इसी तरह की निराधार बातों को लेकर मामला न्यायालय तक पहुंचा था, जहां संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया गया था। इसके बावजूद बार-बार वही आरोप नए शब्दों और नए अंदाज़ में दोहराए जा रहे हैं।
अब यह मामला सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह राजस्व रिकॉर्ड की विश्वसनीयता, प्रशासन की निष्पक्षता और कानून के पालन से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। अजय रेड्डी ने स्पष्ट कहा है कि उन्हें सच्चाई पर पूरा भरोसा है और वे प्रशासन से निष्पक्ष, पारदर्शक और तथ्यात्मक जांच की मांग करते हैं, ताकि वास्तविक स्थिति जनता के सामने आए और निराधार आरोपों पर हमेशा के लिए विराम लगे।


