चंद्रपुर राजुरा विरूर में करोड़ी नाका की शासकीय जमीन गायब, नगर भूमापन क्रमांक 478 में बड़ा जमीन घोटाला उजागर
चंद्रपुर महाराष्ट्र
रिपोर्टर:- रमाकांत यादव रिड पब्लिक न्यूज़ भारत
दिनांक:- ०९ फरवरी २०२६
पूरी खबर:-चंद्रपुर के राजुरा तहसील अंतर्गत विरूर स्टेशन क्षेत्र के करोड़ी नाका परिसर में शासकीय जमीन की खुलेआम हेराफेरी का गंभीर मामला सामने आया है। नगर भूमापन क्रमांक 478 की यह जमीन भूमि अभिलेख विभाग की मूल नोंदवही में स्पष्ट रूप से शासकीय दर्ज है, इसके बावजूद यह जमीन रिकॉर्ड से गायब कर दी गई, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कुछ वर्ष पूर्व तक इसी जमीन पर साप्ताहिक बाजार भरता था। आज भी मौके पर ग्रामपंचायत भवन, बैंक ऑफ इंडिया की इमारत और ग्रामपंचायत की पुरानी कुएं की निशानी मौजूद है। इसके अलावा इस क्षेत्र में जिला परिषद स्कूल, पोस्ट ऑफिस तथा कुछ भाग वन विभाग की जमीन के रूप में दर्ज रहा है। इसके बावजूद राजनीतिक दबाव के चलते इस शासकीय जमीन को नगर भूमापन क्रमांक 378 बताकर कागजों में हेराफेरी कर दी गई।
आरोप है कि अजय रेड्डी नामक व्यक्ति ने राजनीतिक रसूख का उपयोग कर शासन और प्रशासन को गुमराह किया। नगर भूमापन क्रमांक 378 के तहत जयराम पाटील मोरे से सर्वे क्रमांक 141 और 142 में से केवल 64 गुंठे जमीन खरीदी गई थी, लेकिन रिकॉर्ड में इसे बढ़ाकर 84 गुंठे दिखाया गया। भूमि अभिलेख विभाग के आखिव पत्रक में भी 20 गुंठे जमीन बढ़ाने का उल्लेख पाया गया है, जो सीधे तौर पर बड़े जमीन घोटाले की ओर इशारा करता है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ग्रामपंचायत समिति ने पहले ही ठराव पारित कर करोड़ड़ी नाका की शासकीय जमीन में किसी भी प्रकार का फेरफार न करने का निर्णय लिया था। इसके बावजूद तत्कालीन ग्रामविकास अधिकारी गोपाल नैताम ने बिना किसी ठराव और बिना कार्यवाही वृत्तांत दर्ज किए, राजनीतिक दबाव में ग्रामपंचायत संपत्ति अभिलेख में परस्पर नोंद कर दी। इसी आधार पर संपत्ति क्रमांक 397/3 दर्शाकर कुछ व्यक्तियों को अवैध रूप से बिक्री पत्र भी जारी किए गए।
इस पूरे मामले को लेकर विरूर स्टेशन पुलिस थाने में भारतीय दंड विधान की धारा 420, 467 और 468 के तहत अपराध दर्ज करने की मांग के साथ शिकायत दी गई है। तहसील कार्यालय, पंचायत समिति और ग्रामपंचायत में भी सबूतों सहित शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।
करोड़ी नाका परिसर के नागरिकों में इस घोटाले को लेकर जबरदस्त आक्रोश है और मांग की जा रही है कि शासकीय जमीन की लूट में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई कर आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं, ताकि भविष्य में कोई भी शासकीय जमीन पर नजर डालने की हिम्मत न कर सके।


