लोहरा–चिचपल्ली से बल्लारपुर तक सागवान की खुली लूट, करोड़ों का तस्करी रैकेट बेखौफ सक्रिय
चंद्रपुर महाराष्ट्र
रिपोर्टर:- रमाकांत यादव रिड पब्लिक न्यूज़ भारत
दिनांक:- ०७ फरवरी २०२६
पूरी खबर:-चंद्रपुर जिले में सागवान की तस्करी अब चोरी नहीं बल्कि खुलेआम लूट में तब्दील होती नजर आ रही है। लोहरा और चिचपल्ली क्षेत्र के जंगलों से प्रतिदिन करोड़ों रुपये मूल्य की सागवान लकड़ी काटकर लोहरा–चिचपल्ली मार्ग के जरिए सीधे बल्लारपुर लाए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार यह अवैध कारोबार लंबे समय से बिना किसी रोक-टोक के जारी है।
सूत्रों का दावा है कि इस पूरे तस्करी रैकेट में लोहरा ग्राम पंचायत से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोग सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ ही चिचपल्ली क्षेत्र के वन विभाग कार्यालय की टीम की संदिग्ध भूमिका भी सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागीय संरक्षण के बिना इतना बड़ा और नियमित तस्करी नेटवर्क चलना संभव नहीं है।
सबसे गंभीर और चौंकाने वाला आरोप यह है कि लोहरा और चिचपल्ली से निकलने वाली सागवान लकड़ी को जब बल्लारपुर लाया जाता है, तो वहां भी कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से रास्ता साफ कराया जाता है। सूत्रों के अनुसार जांच, नाके और कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है, जबकि जमीनी हकीकत में तस्करी के वाहन बेरोकटोक दौड़ रहे हैं।
स्थानीय सूत्र बताते हैं कि यह कोई इक्का-दुक्का घटना नहीं, बल्कि एक मजबूत और संगठित नेटवर्क है, जिसमें लकड़ी काटने वाले, ढुलाई करने वाले, दलाल और कथित रूप से सिस्टम के भीतर बैठे लोग शामिल हैं। इस पूरे खेल में हिस्सेदारी तय है और अवैध कमाई का पैसा ऊपर तक नियमित रूप से पहुंचाया जा रहा है, इसी कारण जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं।
क्षेत्र में यह चर्चा अब आम हो चुकी है कि जंगलों की इस खुली लूट के पीछे भ्रष्टाचार की जड़ें गहराई तक फैली हुई हैं। सागवान जैसे बहुमूल्य वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से न केवल सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ किया जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और राज्य सरकार इस करोड़ों के सागवान तस्करी रैकेट की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराएंगे या फिर यह अवैध खेल ऐसे ही सिस्टम की शह पर चलता रहेगा।


