अवैध मुरुम उत्खनन पर कार्रवाई पर सवाल, Read Public News24 Bharat के पास मौजूद वीडियो-फ़ोटो बने बड़े सबूत
चंद्रपुर/महाराष्ट्र
रिपोर्टर:- रमाकांत यादव रिड पब्लिक न्यूज़ भारत
दिनांक:- २१ नवंबर २०२५
पूरी खबर:-चंद्रपुर सावल़ी आरएफओ क्षेत्र में शुक्रवार की रात, 21 नवंबर 2025 को अवैध मुरुम उत्खनन के खिलाफ वन विभाग की कथित कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार वन विभाग के पथक ने देर रात अचानक छापा मारते हुए मुरुम उत्खनन में उपयोग हो रही एक जेसीबी मशीन और तीन ट्रैक्टरों को पकड़ने का दावा किया था। हालांकि विभाग की ओर से अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
कई दिनों से गांव के आसपास की कृषि भूमि और प्राकृतिक इलाके में बड़े पैमाने पर मुरुम की अवैध खोदाई की जा रही थी। इस उत्खनन से किसानों की खेती को भारी नुकसान हो रहा था तथा पर्यावरण, भूमि संरचना और भूजल स्तर पर भी गंभीर असर पड़ रहा था। शिकायतों के बाद यह कार्रवाई की गई थी, लेकिन उसके बाद की कार्यवाही पर पूरी तरह सस्पेंस बना हुआ है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उत्खनन स्थल पर मौजूद जेसीबी और ट्रैक्टरों के वीडियो व फ़ोटो Read Public News24 Bharat के पास सुरक्षित हैं। यह साक्ष्य घटना की पुष्टि करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर सार्वजनिक भी किए जा सकते हैं। ये सबूत वन विभाग को भेजे गए थे, लेकिन विभाग की तरफ से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई।
कार्रवाई की वास्तविक स्थिति जानने के लिए रेंज ऑफिसर (RFO) को कई बार फोन किया गया, पर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया और न ही किसी जानकारी को साझा किया। इससे आशंका बढ़ रही है कि कार्रवाई कागज़ पर दर्ज करके कहीं वाहनों को वापस छोड़ तो नहीं दिया गया।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि वन विभाग तत्काल —
🔹 जब्त किए गए वाहनों की आधिकारिक जानकारी जारी करे
🔹 पंचनामा और कार्यवाही का रिकॉर्ड सार्वजनिक करे
🔹 संबंधित आरोपियों के नाम और एफआईआर नंबर घोषित करे
🔹 पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए
नागरिकों का कहना है कि अगर कार्रवाई सही तरीके से हुई है तो विभाग को इसे छिपाने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। वहीं अगर किसी तरह का समझौता या दबाव पड़ा है तो मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जानी चाहिए।
Read Public News24 Bharat ने कहा है कि यदि विभाग कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं करता, तो उपलब्ध वीडियो-फ़ोटो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामला आगे भी उठाया जाएगा।
फिलहाल, क्षेत्र के लोग वन विभाग के आधिकारिक बयान और वास्तविक कार्यवाही सामने आने का इंतजार कर रहे हैं।


