जयपुर के बाद अब इस शहर में भी दुखद हादसा, स्कूल की छत से कूदी 13 वर्षीय छात्रा, टीचर्स की प्रताड़ना बनी कारण?
देश में स्कूलों में विद्यार्थियों के मानसिक उत्पीड़न और बढ़ते दबाव को लेकर एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जयपुर में स्कूल की छत से कूदकर छात्रा की आत्महत्या के मामले के बाद अब एक और शहर में 13 वर्षीय बच्ची ने स्कूल की छत से कूदकर अपनी जान दे दी।
जानकारी के अनुसार बच्ची कक्षा 7 की छात्रा थी और लंबे समय से अपने स्कूल के कुछ शिक्षकों के व्यवहार से परेशान थी। कथित रूप से छात्रा ने टीचर्स द्वारा लगातार डांट-फटकार, अपमान और अतिरिक्त मानसिक दबाव को आत्महत्या की वजह बताया। घटना के बाद स्कूल प्रशासन और शिक्षकों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
घटना के समय स्कूल परिसर में भारी हड़कंप मच गया। तुरंत बच्ची को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि बच्ची को कई दिनों से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसकी शिकायत पहले भी की गई थी लेकिन स्कूल ने उसे नजरअंदाज कर दिया।
परिजनों ने बच्ची द्वारा लिखी गई डायरी, नोट्स और स्कूल बैग में मिले कुछ संदेशों का भी उल्लेख किया है, जिनमें शिक्षकों के खिलाफ शिकायतें दर्ज हैं। यदि यह दस्तावेज़ प्रमाणित पाए जाते हैं तो मामला और गंभीर हो सकता है।
स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और
🔹 स्कूल प्रशासन
🔹 संबंधित शिक्षकों
🔹 स्टाफ के व्यवहार
की जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया जाएगा।
घटना के बाद शहर में गहरा आक्रोश है। सामाजिक संगठनों और अभिभावक संघों ने मांग की है कि —
🔹 मामले की निष्पक्ष जांच हो
🔹 दोषी शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई की जाए
🔹 स्कूलों में बच्चों की काउंसलिंग व्यवस्था अनिवार्य की जाए
🔹 मानसिक उत्पीड़न को अपराध की श्रेणी में कड़े दंड के साथ लागू किया जाए
यह घटना देश में शिक्षा व्यवस्था और विद्यालयों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़ी करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक शैक्षणिक दबाव, डर का माहौल और अनुशासन के नाम पर मानसिक प्रताड़ना कई बच्चों को चरम कदम उठाने तक मजबूर कर रही है।
फिलहाल पुलिस जांच जारी है और आगे की कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।


