Wednesday, April 15, 2026
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अकोला में अनोखी परंपरा, हनुमान जयंती पर ‘वानर सेना’ के लिए सजी शाही पंगत, अनुशासन देख लोग हुए हैरान

अकोला में अनोखी परंपरा, हनुमान जयंती पर ‘वानर सेना’ के लिए सजी शाही पंगत, अनुशासन देख लोग हुए हैरान

अकोला महाराष्ट्र 

रिपोर्टर:- रमाकांत यादव रिड पब्लिक न्यूज़ भारत 

दिनांक:-०३ अप्रैल २०२६

पूरी खबर:-देशभर में गुरुवार 2 अप्रैल को हनुमान जयंती का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भंडारे और शोभायात्राओं का आयोजन हुआ। लेकिन महाराष्ट्र के अकोला जिले से एक ऐसी अनोखी तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया और लोगों को हैरान कर दिया।
अकोला में हनुमान जयंती के पावन अवसर पर ‘वानर सेना’ के लिए खास शाही पंगत सजाई गई। यहां बंदरों को बाकायदा पंक्ति में बैठाकर मिठाइयों और प्रसाद का वितरण किया गया। हैरानी की बात यह रही कि बंदरों ने जिस अनुशासन और शांति के साथ प्रसाद ग्रहण किया, उसे देखकर वहां मौजूद लोग दंग रह गए।
इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक पहुंचे। लोगों ने इस दृश्य को अपने मोबाइल में कैद किया और सोशल मीडिया पर भी यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।
मंदिर के पुजारी रामदास शिंदे महाराज ने बताया कि यह परंपरा कई वर्षों से लगातार चली आ रही है। हर साल हनुमान जयंती के दिन ‘वानर सेना’ को भगवान हनुमान का स्वरूप मानकर उन्हें प्रसाद अर्पित किया जाता है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस आयोजन में बंदरों के लिए विशेष रूप से मिठाइयों, फल और अन्य खाद्य सामग्री की व्यवस्था की जाती है। आयोजन से पहले पूरी जगह को साफ-सुथरा किया जाता है और बंदरों के बैठने के लिए अलग से व्यवस्था बनाई जाती है, ताकि वे आराम से प्रसाद ग्रहण कर सकें।
इस परंपरा का सबसे खास पहलू यह है कि यहां बंदरों के बीच किसी तरह की छीना-झपटी या अफरा-तफरी नहीं होती, बल्कि वे शांतिपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करते हैं। यह दृश्य न सिर्फ लोगों को आश्चर्यचकित करता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि यदि सही तरीके से व्यवस्था की जाए, तो प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जिया जा सकता है।
हनुमान जयंती के इस पावन अवसर पर अकोला की यह अनोखी परंपरा एक बार फिर लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही और श्रद्धा के साथ-साथ सामाजिक और प्राकृतिक संतुलन का सुंदर संदेश देती नजर आई।

संपादक

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