Sunday, June 14, 2026
HomeBreaking newsसुप्रीम कोर्ट के नए कैलेंडर पर देशभर में उठे सवाल, 5.3 करोड़...

सुप्रीम कोर्ट के नए कैलेंडर पर देशभर में उठे सवाल, 5.3 करोड़ लंबित मामलों के बीच न्यायपालिका की लंबी छुट्टियों पर बहस तेज

 सुप्रीम कोर्ट के नए कैलेंडर पर देशभर में उठे सवाल, 5.3 करोड़ लंबित मामलों के बीच न्यायपालिका की लंबी छुट्टियों पर बहस तेज

सुप्रीम कोर्ट का नया कैलेंडर जारी होते ही पूरे देश में एक नई बहस छिड़ गई है। न्यायपालिका के कामकाजी दिनों और लंबित मामलों की संख्या को लेकर लोगों में गहरा असंतोष देखने को मिल रहा है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष के 365 दिनों में सिर्फ 219 दिन ही न्यायिक कार्य होता है, जबकि बाकी दिनों को छुट्टियों और अवकाश के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

कानूनी विशेषज्ञों और याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब देश में 5.3 करोड़ से अधिक मामले लंबित हों, तब न्यायपालिका का इतना लंबा अवकाश गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। सवाल यह उठ रहा है कि जहां न्याय में देरी स्वयं अन्याय मानी जाती है, वहीं इतने बड़े केस बैकलॉग के बावजूद छुट्टियों का ढांचा जस का तस क्यों है?

सामान्य नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने भी तुलना करते हुए कहा है कि यदि पुलिस, स्वास्थ्य विभाग या अन्य सरकारी सेवाएं इसी तरह लंबी छुट्टियाँ लें, तो व्यवस्था ठप हो जाएगी। ऐसे में अदालतों का कार्य दिवस सीमित रहना आम जनता की न्याय तक पहुंच को और कठिन बना रहा है।

देशभर में अब न्यायिक सुधारों की मांग फिर जोर पकड़ने लगी है। विशेषज्ञों का मत है कि न्यायपालिका को छुट्टी नीति में बदलाव, लोक अदालतों की संख्या बढ़ाने, डिजिटल सुनवाई को और मजबूत करने तथा न्यायिक पदों की संख्या में वृद्धि जैसे कदम तुरंत उठाने होंगे।

न्याय प्रणाली में देरी को दूर करने और आम जनता को समय पर फैसला देने की दिशा में सरकार और न्यायपालिका दोनों से ठोस पहल की अपेक्षा बढ़ गई है।

 

संपादक

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

Most Popular