राजुरा पुल हादसे में लापरवाही पर पर्दा, राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में सुरक्षा की अनदेखी जारी
पूरी खबर:-आज से ठीक एक साल पहले, 26 नवम्बर 2024 को राजुरा शहर के समीप वर्धा नदी पर निर्माणाधीन पुल का एक पिलर अचानक ढह गया था। उस हादसे में कई मजदूर घायल हुए थे और सूत्रों के अनुसार, हादसे में कुछ मजदूरों की मौत की आशंका भी जताई जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बावजूद न जांच पूरी हुई, न किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई हुई।
यह हादसा उस समय हुआ था जब राजुरा–गढ़चांदूर राष्ट्रीय राजमार्ग के विस्तार कार्य में तेजी लाई जा रही थी। करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे इस प्रोजेक्ट पर तब भी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पुल निर्माण में घटिया दर्जे की सामग्री, सीमेंट और रेत का उपयोग किया गया तथा मजदूरों से बिना हेलमेट और सुरक्षा बेल्ट के काम करवाया गया।
दुर्घटना के बाद कुछ दिनों तक प्रशासन और ठेकेदारों की गतिविधियाँ तेज़ रहीं, लेकिन समय बीतने के साथ मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब एक वर्ष बाद भी वही लापरवाही राष्ट्रीय राजमार्ग के अन्य हिस्सों में देखी जा सकती है।
28 अगस्त को राजुरा–गढ़चांदूर मार्ग पर कपाणगांव के पास ट्रक और ऑटो की टक्कर में छह लोगों की मौत हुई थी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर प्रशासन और ठेकेदारों ने पिछले हादसे से सबक लिया होता, तो शायद यह दुर्घटना टल सकती थी।
वर्धा नदी पुल और राजमार्ग निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संभाल रही जीआर इंफ्रा कंपनी के किसी अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका। नागरिकों ने मांग की है कि पुल हादसे की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
राजुरा पुलिस थाना प्रभारी योगेश्वर पारधी ने बताया था कि घटना की जांच की जाएगी और निर्माण कंपनी द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से उठाए गए कदमों की जानकारी ली जाएगी। लेकिन अब तक इस जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास के नाम पर चल रहे इन निर्माण कार्यों में जब तक जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक सड़कें नहीं, बल्कि हादसे बनते रहेंगे।


