Sunday, June 14, 2026
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चंद्रपुर भाजपा में घमासान – मुनगंटीवार गुट को पार्टी अनुशासन की नोटिस!

चंद्रपुर भाजपा में घमासान – मुनगंटीवार गुट को पार्टी अनुशासन की नोटिस!

चंद्रपुर/महाराष्ट्र 

रिपोर्टर:- रमाकांत यादव रिड पब्लिक न्यूज़ भारत मिडिया नेटवर्क 

तारीख:- 28 जुलाई 2025

 पूरी खबर:- चंद्रपुर भाजपा में एक बार फिर सियासी पारा आसमान छू रहा है!
मामला गर्म है, चेहरे तमतमाए हुए हैं और पीछे से चल रहा है एक जबरदस्त गुटबाजी का खेल!

आठ माजी नगरसेवकों को नोटिस!  मुनगंटीवार समर्थक आठ पूर्व नगरसेवकों और कुछ पदाधिकारियों को पार्टी अनुशासन तोड़ने का नोटिस जारी किया गया है।

नोटिस भेजने वाले कोई और नहीं बल्कि चंद्रपुर भाजपा महानगर अध्यक्ष सुभाष कासनगट्टुवार हैं। वजह क्या है? बात बस इतनी-सी थी कि इन नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के जन्मदिन पर विधायक किशोर जोरगेवार द्वारा आयोजित ‘देवाभाऊ जनकल्याण सेवा सप्ताह’ में हिस्सा नहीं लिया।

और जवाब में – “दो दिन में लिखित स्पष्टीकरण दो, वरना अनुशासनात्मक कार्रवाई झेलो!”
– ऐसा कासनगट्टुवार ने अपने पत्र में लिखा है। लेकिन अब पलटवार हुआ है! मुनगंटीवार समर्थकों ने उस नोटिस को सीधे ‘कचरे की टोकरी’ में डाल दिया है!

उनका साफ कहना है “यह कार्यक्रम पार्टी का नहीं, जोरगेवार का निजी आयोजन था। पार्टी या प्रदेश नेतृत्व की तरफ से कोई आधिकारिक निर्देश नहीं आया। फिर हमपर जबरदस्ती क्यों?”

पूर्व जिलाध्यक्ष राहुल पावडे ने खोली जुबान“कासनगट्टुवार पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। पार्टी में जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा है। हम इसकी शिकायत सीधे प्रदेश अध्यक्ष से करेंगे। और सबसे बड़ी बात –पावडे ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने खुद कहा था कि उनका जन्मदिन सादगी से मनाया जाए, और कार्यकर्ता मुख्यमंत्री सहायता निधि में योगदान करें।

तो फिर ये भव्य आयोजन और उस पर नोटिसबाजी – आखिर किसके इशारे पर?

भाजपा में दो खेमे खुलकर सामने हैं एक तरफ मुनगंटीवार गुट, दूसरी तरफ जोरगेवार खेमा

जोरगेवार के हाथ में संगठन की लगाम है, उन्होंने फडणवीस को 50 नगरसेवक जिताने का वादा किया है, वहीं मुनगंटीवार धीरे-धीरे संगठन में हाशिए पर जा रहे हैं। उनके कई पुराने सिपहसालार अब विरोधी खेमें में शामिल हो चुके हैं।

अब भी कई मुनगंटीवार समर्थक मैदान में डटे हैं और सवाल पूछ रहे हैं –“जब पार्टी ने कोई आदेश ही नहीं दिया, तो ये अनुशासन का तमाशा क्यों?”

तो सवाल ये है – चंद्रपुर भाजपा की ये लड़ाई क्या खुलेआम युद्ध में बदल जाएगी?
क्या नोटिस की सियासत पार्टी को नुकसान पहुंचाएगी?

फिलहाल एक ही बात तय है – चंद्रपुर भाजपा में सियासत की थाली में तगड़ा मिर्च-मसाला पड़ा है, और हर दिन नया ड्रामा तय है!

संपादक

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