Friday, June 5, 2026
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“जेल जाएंगे, लाठी-गोली खाएंगे, लेकिन हटेंगे नहीं” — नागपुर में बच्चू कडू के नेतृत्व में किसानों का उग्र आंदोलन, हाईकोर्ट का आदेश भी बेअसर

“जेल जाएंगे, लाठी-गोली खाएंगे, लेकिन हटेंगे नहीं” — नागपुर में बच्चू कडू के नेतृत्व में किसानों का उग्र आंदोलन, हाईकोर्ट का आदेश भी बेअसर

नागपुर / महाराष्ट्र 

रिपोर्टर:- रमाकांत यादव रिड पब्लिक न्यूज़ भारत 

दिनांक:-३० अक्टूबर २०२५


पूरी खबर:-
मुख्यमंत्री की सिटी नागपुर इन दिनों किसानों के गुस्से से थर्रा उठी है।
पूर्व विधायक और प्रहार संगठन के प्रमुख बच्चू कडू की अगुवाई में किसानों ने कर्जमाफी और सातबारा कोरा करने की मांग को लेकर आंदोलन छेड़ दिया है, जो अब उग्र रूप ले चुका है।

पिछले 36 घंटे से अधिक समय से हजारों किसान सड़कों पर डटे हुए हैं।
वर्धा रोड समेत चार प्रमुख हाईवे पूरी तरह ठप हैं।
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने बुधवार शाम 6 बजे तक हाईवे खाली करने का आदेश दिया था,
लेकिन आंदोलनकारियों ने साफ कह दिया —

“हम लाठी-गोली खाने को तैयार हैं, सरकार चाहे तो जेल भेज दे, लेकिन आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।”

 आंदोलन का विस्तार

किसानों ने महाल चौक से लेकर संविधान चौक तक सड़कों पर कब्जा जमाया हुआ है।
हजारों किसान नागपुर की सीमा पर मंगलवार दोपहर से डेरा डाले बैठे हैं।
रात उन्होंने सड़कों, खेतों और ढाबों पर गुजारी, और सुबह फिर सड़क पर उतर आए।

बच्चू कडू के साथ मंच पर किसान नेता वामनराव चटप, राजू शेट्टी, महादेव जानकर, अजीत नवले, रवि तुपकर समेत कई वरिष्ठ नेता डटे हुए हैं।
सरकार की ओर से राज्य मंत्री पंकज भोयर और आशीष जायसवाल आंदोलन स्थल पहुंचे,
लेकिन घंटों चली बातचीत के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला।
कडू ने साफ कहा —

“जब तक हमारी मांगों पर लिखित आदेश नहीं मिलता, आंदोलन खत्म नहीं होगा।”


🚜 हाईवे और रेल रोको

आंदोलन के चलते वर्धा, चंद्रपुर, उमरेड और काटोल रोड पर यातायात पूरी तरह बाधित है।
समृद्धि महामार्ग पर प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
कुछ किसानों ने रेल रोको की कोशिश भी की, जिसे पुलिस ने विफल कर दिया।
शहर में ट्रैफिक जाम से आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।


⚖️ हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

चारों राजमार्ग ठप होने और व्यवस्था चरमराने पर बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए आदेश दिया कि आंदोलन स्थल बुधवार शाम 6 बजे तक खाली कर दिया जाए।
लेकिन किसानों ने कोर्ट के आदेश को ठुकराते हुए कहा —

“कोर्ट किसानों की समस्याओं पर इतनी संवेदनशीलता कब दिखाएगा?
आज अगर हम सड़कों पर हैं, तो यह हमारी मजबूरी है, जिद नहीं।”


📜 किसानों की 19 मांगें

आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार को 19 मांगों की सूची सौंपी है।
इनमें से 12 मांगों को ‘A’ श्रेणी में रखा गया है, जिन्हें तत्काल मंजूरी देने की बात कही गई है।
मुख्य मांगों में शामिल हैं —

  • किसानों के सभी बकाए कर्ज की पूर्ण माफी
  • सातबारा कोरा करने का आदेश
  • फसल बीमा राशि का पारदर्शी वितरण
  • सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत पैकेज
  • किसानों पर दर्ज झूठे केसों की वापसी

शेष मांगों पर सरकार और किसान संगठनों के बीच चर्चा जारी है।


💬 आंदोलन स्थल पर बढ़ा तनाव

जैसे-जैसे समय बीत रहा है, आंदोलन का माहौल और गरमाता जा रहा है।
किसानों ने स्पष्ट कहा है कि अगर सरकार ने जल्द सुनवाई नहीं की तो वे पूरे महाराष्ट्र में आंदोलन को फैलाएंगे।
इस बीच, मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे भी नागपुर की ओर रवाना हो गए हैं।
जरांगे के पहुंचने के बाद आंदोलन और तेज होने की संभावना है।


🚨 प्रशासन सतर्क

नागपुर पुलिस, SRPF और अन्य सुरक्षा बलों को शहर के विभिन्न हिस्सों में तैनात किया गया है।
प्रशासन लगातार अपील कर रहा है कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें,
लेकिन प्रदर्शन स्थल पर नारों, भजनों और घोषणाओं के बीच हर किसान का एक ही स्वर —

“जय किसान! जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, हम नहीं हटेंगे!”

बच्चू कडू के नेतृत्व में शुरू हुआ नागपुर का यह किसान आंदोलन अब सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
किसानों ने साफ कह दिया है —

“अगर जरूरत पड़ी, तो जेल जाएंगे, लाठी-गोली खाएंगे, लेकिन आंदोलन नहीं छोड़ेंगे।”

हजारों किसानों की यह एकजुटता अब केवल नागपुर नहीं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र की आवाज बन चुकी है।
देखना होगा कि सरकार किसानों की इन 19 मांगों पर क्या रुख अपनाती है —
या फिर नागपुर की यह धरती एक और ऐतिहासिक किसान संघर्ष की गवाह बनेगी।

संपादक

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