Sunday, June 14, 2026
HomeBreaking newsचंद्रपुर–राजुरा क्षेत्र में रेत तस्करी का खुला खेल, धाबा घाट पर कार्रवाई...

चंद्रपुर–राजुरा क्षेत्र में रेत तस्करी का खुला खेल, धाबा घाट पर कार्रवाई तो हुई, लेकिन मूर्ति–कोहपरा–वर्धा नदी घाटों से बड़े पैमाने पर रेत चोरी जारी

चंद्रपुर–राजुरा क्षेत्र में रेत तस्करी का खुला खेल, धाबा घाट पर कार्रवाई तो हुई, लेकिन मूर्ति–कोहपरा–वर्धा नदी घाटों से बड़े पैमाने पर रेत चोरी जारी

चंद्रपुर/राजुरा। एक तरफ गोंडपिपरी तहसील में राजस्व विभाग ने धाबा रेत घाट पर लगातार कार्रवाई कर बिना नंबर के ट्रैक्टर जब्त किए हैं, वहीं दूसरी तरफ राजुरा क्षेत्र के मूर्ति, कोहपरा और वर्धा नदी घाट पर रेत तस्करी ने प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है। इलाके में निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन रेत घाटों की नीलामी अब तक नहीं की गई है। इसके बावजूद निर्माण कार्यों में बिना किल्लत रेत की आपूर्ति होना इस ओर साफ इशारा करता है कि लाखों रुपयों की रेत चोरी कर बाजार में बेची जा रही है।

धाबा रेत घाट पर बड़ी कार्रवाई, दो ट्रैक्टर जब्त
गोंडपिपरी तहसील में सोमवार (24 नवंबर) को राजस्व विभाग ने गुप्त सूचना के आधार पर धाबा रेत घाट पर छापेमारी की, जिसमें दो बिना नंबर के ट्रैक्टर जब्त किए गए। पिछले चार दिनों में कुल छह ट्रैक्टर और एक हाइवा जब्त कर विभाग ने तस्करों पर नकेल कसने का प्रयास किया है। यह कार्रवाई उपविभागीय अधिकारी लघिमा तिवारी (IAS), तहसीलदार शुभम बहाकर और मंडल अधिकारी सुकेसानी कांबले के मार्गदर्शन में की गई। तलाठी अश्विनी शेल्के, संदीप बोडामवाड़ और गौरव मेश्राम ने इसमें अहम भूमिका निभाई।

परंतु राजुरा क्षेत्र में रेत चोरी बेलगाम—प्रशासन बेखबर या खामोश?
राजुरा तहसील में मूर्ति, कोहपरा, वर्धा नदी घाटों पर बड़े पैमाने पर रेत उत्खनन दिन–रात जारी है। स्थानीय निर्माण कार्यों में रेत की कमी न होना ही रेत चोरी की सबसे बड़ी गवाही है। प्रशासन की ओर से नीलामी न होने के बावजूद रेत की निर्बाध सप्लाई से सरकारी राजस्व को लाखों की चपत लग रही है। आरोप है कि तस्करों ने नदी तक पहुंचने के लिए जेसीबी से रास्ते तैयार कर लिए हैं, और विहिरगांव पटवारी क्षेत्र के कई नदी–नालों से खुलेआम रेत की निकासी हो रही है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन जानबूझकर आंखें बंद किए बैठा है, या फिर रेत माफिया के दबाव में निष्क्रिय है। पुलिस और राजस्व विभाग की निरंतर अनदेखी से तस्करों के हौसले बुलंद हैं।

निगरानी और कड़ी कार्रवाई की मांग
गोंडपिपरी में की गई कार्रवाई ने यह दिखाया है कि सख्ती होने पर तस्करी रोकी जा सकती है, लेकिन राजुरा–वर्धा नदी बेल्ट में प्रशासन की उदासीनता सबसे बड़ा सवाल खड़ा करती है। नागरिकों ने मांग की है कि धाबा घाट जैसी ही कड़ी कार्रवाई मूर्ति, कोहपरा और वर्धा नदी घाट पर भी की जाए, ताकि रेत माफिया पर अंकुश लगे और सरकारी राजस्व की चोरी रुक सके।

#Chandrapur #Rajura #RetTskari #RevenueDept #IllegalSandMining

संपादक

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

Most Popular