बच्चों को खुश रखने की चाह में अनजाने में बढ़ रहा दबाव, कई पेरेंट्स की आदतों से बच्चे हो रहे भावनात्मक रूप से आहत
नई दिल्ली : हर माता-पिता की सबसे बड़ी ख्वाहिश होती है कि उनका बच्चा खुश रहे, सुरक्षित रहे और जीवन में आगे बढ़े। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के लिए “सबसे अच्छा” करने की कोशिश में कई पेरेंट्स अनजाने में ऐसी गलतियां कर देते हैं, जो बच्चों के मन पर गहरा भावनात्मक असर छोड़ती हैं।
बच्चों पर लगातार पढ़ाई, स्कूल में टॉप करने, अच्छी परफॉर्मेंस देने और हर क्षेत्र में आगे रहने का दबाव बढ़ता जा रहा है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यह दबाव कई बार इतना बढ़ जाता है कि बच्चे अपने ही माता-पिता की कुछ आदतों से नफरत और दूरी महसूस करने लगते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों को खुश करने के लिए सुविधाएं देना अच्छी बात है, लेकिन भावनात्मक सपोर्ट, सुनना, समझना और सम्मान देना कहीं अधिक जरूरी है। बच्चों की भावनाओं को नजरअंदाज करना, उनकी राय को महत्व न देना, दूसरों के सामने तुलना करना, और हर समय कंट्रोल करने की कोशिश करना बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव डालता है।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों की सबसे बड़ी जरूरत है — प्यार, समय और समझ। प्रतियोगिता की दौड़ में शामिल करने से पहले माता-पिता को यह देखना जरूरी है कि बच्चा क्या चाहता है, उसकी रुचि क्या है और वह किस दिशा में सहज है।
विशेषज्ञों ने संदेश दिया है कि माता-पिता बच्चों को खुश करने के लिए कोशिश जरूर करें, लेकिन उन पर अवांछित दबाव बिल्कुल न डालें। सही मार्गदर्शन, सहयोग और भावनात्मक सुरक्षा से ही बच्चे आत्मविश्वासी बनते हैं और जीवन में आगे बढ़ते हैं।
(Read Public News विशेष रिपोर्ट)


