“बंगाल में SIR के बीच नया खुलासा — 70 वर्षीय महिला का नाम 44 मतदाता सूचियों में दर्ज”
कोलकाता / पश्चिम बर्धमान, 24 नवंबर 2025 — पश्चिम बर्धमान जिले के पांडवेश्वर विधानसभा क्षेत्र में चल रहे मतदाता सूची संशोधन अभियान (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। स्थानीय निवासी 70 वर्षीय मायारानी गोस्वामी का नाम राज्य के विभिन्न जगहों पर कुल 44 अलग-अलग मतदाता सूचियों में दर्ज पाया गया।
मामले का विवरण
- मायारानी गोस्वामी के नाम की यह अनियमितता पांडवेश्वर विधानसभा क्षेत्र में तब उजागर हुई जब SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता नामों की पुष्टि-जांच चल रही थी।
- इस खुलासे के बाद राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने केंद्रीय और राज्य निर्वाचन आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे मतदाता सूची में फर्जी प्रविष्टि एवं डुप्लीकेट प्रविष्टि का मामला बताया है।
- वहीं आल इंडिया त्रिनमूल कांग्रेस (तृणमूल) ने भाजपा पर प्रोपगैंडा चलाने का आरोप लगाया है और कहा है कि जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए।
- SIR प्रक्रिया के तहत यह सुनिश्चित किया जाना है कि मतदाता सूची में डुप्लीकेट, मृत व्यक्तियों या गैर-अधिकारिक प्रविष्टियों का समावेश न हो।
संभावित प्रभाव
- इस तरह के खुलासे से मतदाता सूची की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
- आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह मामला संवेदनशील हो गया है क्योंकि SIR के माध्यम से मतदाता सूची को सफाई देने, फर्जी नाम हटाने और वास्तविक मतदाता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया चल रही है।
- स्थानीय प्रशासन एवं निर्वाचन अधिकारियों पर दबाव बढ़ गया है कि वे इस मामले की गहराई से जांच करें और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करें।
आगे की कार्रवाई
- राज्य निर्वाचन आयोग एवं संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि दोष-प्रविष्टियों की पहचान करें, सूची-जांच को मजबूत करें और नियमानुसार सुधारात्मक कदम उठाएँ।
- SIR के तहत सभी मतदाता को यह अवसर है कि वे अपने नाम, स्थानांतरण, विवरण आदि की पुष्टि कराने के लिए समय पर आवेदन करें।
- राजनीतिक दलों से अनुरोध है कि वो इस प्रक्रिया को शांतिपूर्ण तरीके से चलने दें और मतदाता सूची के संबंध में किसी भी तरह की भय-प्रेरणा या दवाब व्यवस्था से दूर रहें।
यह मामला राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुद्धता तथा चुनावी निष्पक्षता से जुड़ा है, और समय रहते उचित कार्रवाई न होने पर विश्वास-घाटा का जोखिम बढ़ सकता है


