बाल दिवस पर दिल दहला देने वाली घटना: 10 मिनट लेट होने पर छात्रा को 100 उठक-बैठक करानी पड़ी, फिर मौत
वसई (महाराष्ट्र) की एक स्कूल छात्रा, काजल गोंड (क्लास 6), 14 नवंबर को अपनी जान गंाकर परिवार और समाज में गहरे शोक का माहौल छोड़ गई है। आरोप है कि उसे 8 नवंबर को स्कूल में 10 मिनट लेट आने पर उसकी शिक्षक द्वारा 100 उठक-बैठक (sit-ups) करवाने का शारीरिक दंड दिया गया।
छात्रा ने यह दंड अपनी स्कूल-बैग अपने कंधों पर लटकाए हुए पूरे किया था, जिससे उसकी पीठ और गर्दन में गंभीर दर्द हुआ।
पंजाब के बाद जब स्वास्थ्य बिगड़ गया, तो उसे स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया और अंततः जे. जे. अस्पताल, मुंबई ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
परिवार ने दंड को “अमानवीय” और शारीरिक यातना बताया है, विशेष रूप से यह देखते हुए कि काजल के पास पहले से एक चिकित्सकीय समस्या थी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए लोकगुरक्षक दल (MNS) ने स्कूल प्रबंधन पर कड़ी आपत्तियाँ उठाईं हैं।
शिल्ड हनुमंत विद्या मंदिर, वह स्कूल जहाँ यह घटना घटी, उसकी कक्षाएं कथित रूप से केवल कक्षा 8 तक लाइसेंस प्राप्त थीं, लेकिन स्कूली नामांकन में इस सीमा का उल्लंघन किया गया था, जिसे शिक्षा अधिकारी द्वारा अवैध बताया गया है।
वसई-विरार-शिक्षा विभाग ने तुरंत एक जांच दल गठित किया है। वलिव पुलिस ने अकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (ADR) दर्ज की है।
बल शास्त्र (कॉर्पोरल पनिशमेंट) और बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे को दोबारा जोरदार तरीके से उठाया गया है। शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि ऐसी प्रथा कानूनी रूप से गलत है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मांगे और सुझाव:
- छात्रा के परिवार को न्याय दिलाने के लिए शीघ्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
- स्कूल और शिक्षकों पर दंडात्मक तरीके की समीक्षा होनी चाहिए; कठोर शारीरिक सज़ा पर रोक लगाई जानी चाहिए।
- शिक्षा विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी स्कूल कानूनन मान्य हों और बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि हो।
- माता-पिता एवं छात्र-समुदाय में बच्चों की शिक्षा और समाश्रय अधिकारों पर जागरूकता बढ़ानी होगी।
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