राजुरा में ‘मौत का पुल’ — एक साल बाद भी जवाबदेही ज़ीरो!
जनता पूछ रही है — क्या जीआर इन्फ्रा और अफसरों का गठजोड़ है?
राजुरा (चंद्रपुर) —
26 नवंबर 2024 को वर्धा नदी पर बन रहे पुल का पिलर गिरा, मजदूर घायल हुए, और सरकार ने जांच के आदेश दिए —
लेकिन आज एक साल बाद भी न कोई रिपोर्ट, न कोई कार्रवाई!
जनता अब खुलकर बोल रही है —
“ये हादसा नहीं, भ्रष्टाचार का मलबा था जो मजदूरों पर गिरा था।”
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जीआर इन्फ्रा कंपनी घटिया निर्माण कर रही है,
सीमेंट और रेत में मिलावट से लेकर लापरवाह मजदूरी तक, सब खुलेआम चल रहा है।
फिर भी अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं —
क्योंकि “ऊपर तक हिस्सा जाता है”, ऐसा लोगों का साफ आरोप है।
राजुरा-गढ़चांदूर रोड पर हालात इतने खराब हैं कि सड़क अब मौत का जाल बन चुकी है।
हर हफ्ते हादसे, हर महीने लाशें,
लेकिन विभाग को फर्क ही नहीं पड़ता।
लोगों का कहना है —
“सड़क पर खून बह रहा है, और दफ्तरों में चाय पीकर फाइलें दबाई जा रही हैं।”
कई बार शिकायतें गईं, लेकिन जवाब वही — “जांच जारी है।”
जांच इतनी ‘जारी’ है कि शायद अब मजदूरों की जान से भी ज्यादा लंबी हो गई है!
अब नागरिकों ने तय किया है कि
अगर जल्द ही कार्रवाई नहीं हुई तो वे मुख्यमंत्री कार्यालय और लोकनिर्माण मंत्री को सामूहिक शिकायत भेजेंगे।
जनता की मांग है —
जीआर इन्फ्रा और इस प्रोजेक्ट से जुड़े अफसरों की संपत्ति जांची जाए,
और जो दोषी हों, उन पर गंभीर अपराध दर्ज हो।
राजुरा के लोगों ने कहा —
“हम विकास नहीं, विनाश झेल रहे हैं।
अब सिस्टम नहीं सुधरा, तो सड़क नहीं छोड़ेंगे — सड़क पर उतरेंगे।”


