रिंगस रेलवे स्टेशन पर शौचालय और स्नानगृह के नाम पर यात्रियों से जबरन वसूली, प्रशासन चुप्पी साधे बैठा—सख्त जांच व तत्काल सुधार की मांग
रिपोर्टर:- रमाकांत यादव रिड पब्लिक न्यूज़ भारत
दिनांक:- १३ नवंबर २०२५
पूरी खबर:-राजस्थान के सीकर जिले के रिंगस रेलवे स्टेशन पर हमारी टीम द्वारा की गई हाल की पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि स्टेशन पर मौजूद शुलभ शौचालय व स्नानगृह का संचालन करने वाले कुछ लोग यात्रियों से खुलेआम उपयोग के बदले पैसे वसूल कर रहे हैं। प्रति व्यक्ति ₹20 की मांग की जा रही है और जो यात्री भुगतान करने से इनकार करते हैं उन्हें धमका कर या हटा कर वहाँ से निकाल दिया जाता है। इस वसूली के दौरान न तो किसी प्रकार की रसीद दी जाती है और न ही किसी आधिकारिक अभिलेख का उल्लेख मिलता है, जिससे यह सब व्यवस्थित और अवैध गतिविधि लगती है।
हमारी टीम ने यह भी पाया कि रिंगस स्टेशन पर हर दिन हजारों श्रद्धालु और यात्री खाटूश्यामजी के लिए यात्रा करते हैं। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार यह वसूली विशेष रूप से उन यात्रियों से की जा रही है जो स्नान या शौचालय जैसी अनिवार्य आवश्यकताओं के लिए मजबूर हैं। स्टेशन परिसर में उपस्थित अधिकांश यात्रियों ने बताया कि वे अक्सर डर के कारण विरोध नहीं कर पाते और मजबूरी में पैसे दे देते हैं। स्टेशन प्रबंधन की ओर से न तो किसी प्रकार की चेतावनी मिली है और न ही इस पर कोई सार्वजनिक सूचना प्रदर्शित है।
रेलवे और सार्वजनिक सुविधाओं के संचालन से जुड़े नियमों के अनुसार यात्रियों की मूलभूत सहूलियतें सुनिश्चित करनी रेलवे की जिम्मेदारी है। सार्वजनिक शौचालय व स्वच्छता जैसी सुविधाएँ यात्रियों के उपयोग के लिए उपलब्ध करवाई जानी चाहिए और किसी भी प्रकार की अनाधिकृत वसूली स्वीकार्य नहीं है। साथ ही यात्रियों का भय मिटाने और सुविधाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए स्टेशन पर मौजूद सीसीटीवी फुटेज, त�t्कालीन कर्मचारियों के ब्योरे और रजिस्टरों का परीक्षण आवश्यक है।
हमारी रिपोर्ट के आधार पर स्थानीय यात्रियों और श्रद्धालुओं ने मांग की है कि प्रशासन निम्नलिखित कदम तुरंत उठाए: तत्काल प्रभाव से वसूली कर रहे लोगों की पहचान कर उन्हें रोकना, स्टेशन परिसर में तैनात सुरक्षा कर्मियों और स्टेशन प्रबंधन के बीच स्पष्टीकरण माँगना, सीसीटीवी फुटेज की जांच कर साक्ष्य एकत्र करना, यात्रियों को दी जाने वाली किसी भी तरह की रसीद या परमीशन का पालन सुनिश्चित करना तथा भविष्य में ऐसे आयोजन न हों इसके लिए नियमित निगरानी व्यवस्था लागू करना। यदि संबंधित अधिकारी मौन बनाए रखते हैं तो यात्रियों के पास रेलमद सहायता नंबर 139, रेलवे सुरक्षा बल (RPF), तथा स्थानीय पुलिस को शिकायत दर्ज करवाने का अधिकार है। इसके अलावा गंभीर मामलों में उपभोक्ता शिकायत या जनहित याचिका के माध्यम से भी कार्रवाई योग्य है।
हम स्टेशन प्रबंधन और संबंधित विभागों से अनुरोध करते हैं कि वे शीघ्रता से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें ताकि यात्रियों को आराम से, भय मुक्त और निशुल्क बुनियादी सुविधाएँ मिल सकें। यदि आवश्यक हो तो रेल विभाग सार्वजनिक तौर पर सफाई के नए नियम और भुगतान पर स्पष्ट निर्देश जारी करे तथा किसी भी प्रकार की वसूली पर कड़ी निगरानी रखें।
हमारी टीम आगे भी इस मामले की निगरानी करेगी और जांच के परिणाम आने पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित करेगी। यात्रियों और पाठकों से अनुरोध है कि यदि किसी के पास इस वसूली के वीडियो, फोटो या प्रत्यक्ष प्रमाण हों तो वह हमें उपलब्ध कराएँ ताकि उचित कार्रवाई में मदद मिल सके।
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