५ हजार ४५९ पुलिस कर्मियों को मिलेगा अपना हक का घर — आ. सुधीर मुनगंटीवार के निरंतर प्रयासों से संभव हुआ बड़ा फैसला
चंद्रपुर, महाराष्ट्र
रिपोर्टर:- रमाकांत यादव रिड पब्लिक न्यूज़ भारत
दिनांक:- ८ नवंबर २०२५
पूरी खबर:-राज्य के पूर्व वन, सांस्कृतिक कार्य और मत्स्य व्यवसाय मंत्री आ. सुधीर मुनगंटीवार के निरंतर और दृढ़ प्रयासों से महाराष्ट्र के ५ हजार ४५९ पुलिस कर्मचारियों को अब अपने हक का घर मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इस निर्णय से राज्यभर के पुलिस कर्मियों में हर्ष का माहौल है। पुलिस दल ने आ. श्री मुनगंटीवार के प्रति आभार व्यक्त किया है।
इस निर्णय के तहत, लंबे समय से लंबित डी.जी. लोन (पुलिस गृह निर्माण अग्रिम योजना) को मंजूरी मिल गई है। राज्य सरकार ने इस योजना के लिए १७६८.०८ करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। गृह विभाग के उपसचिव द्वारा इसके आदेश जारी किए गए हैं।
आ. श्री मुनगंटीवार ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं मुख्यमंत्री देवेंद्रजी फडणवीस के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है, जिन्होंने इस विषय को संवेदनशीलता से लेते हुए पुलिस कर्मियों के हक का प्रश्न सुलझाया।
गौरतलब है कि डी.जी. लोन योजना के अंतर्गत उन पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को गृह निर्माण हेतु मूल वेतन का १२५ प्रतिशत ऋण दिया जाता है जिनके पास स्वयं का मकान नहीं है। अगस्त २०२३ से लेकर अब तक लगभग ५ हजार ४५९ पुलिस कर्मियों ने इस योजना के तहत आवेदन किया था, परंतु बीते दो वर्षों से एक भी आवेदन स्वीकृत नहीं हुआ था।
राज्यभर से ४ हजार ७११ तथा मुंबई से ७४८ आवेदन ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त हुए थे, जिनके लिए कुल १७६८ करोड़ रुपये की निधि आवश्यक थी। अब इस निधि की स्वीकृति से इन सभी आवेदनों को मंजूरी मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
संवेदनशीलता, तत्परता और सतत प्रयास का परिणाम
गृह ऋण (डीजी लोन) के लिए पुलिस कर्मियों को दो वर्षों से संघर्ष करना पड़ रहा था। आ. श्री मुनगंटीवार ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए विधानसभा में बार-बार उठाया और शासन का ध्यान आकर्षित किया। उनके निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि सरकार ने यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
पुलिस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अब अपने ‘हक के घर’ का सपना साकार कर सकेंगे। यह निर्णय न केवल एक वित्तीय राहत है, बल्कि उन हजारों परिवारों के लिए आत्मसम्मान का प्रतीक भी है, जो वर्षों से अपने घर के लिए प्रतीक्षा कर रहे थे।


