खांसी की दवा से एक बच्चे की मौत, डॉक्टर समेत 10 बीमार… राजस्थान में सरकारी केंद्रों तक कैसे पहुंचा दागी कंपनी का सिरप?
रिपोर्टर:- नरसिंग बी बोल्लम रिड पब्लिक न्यूज 24 भारत मिडिया नेटवर्क
दिनांक 2 अक्टूबर
राजस्थान में खांसी की दवा पीने से अब तक पांच जिलों में 10 बच्चे और एक डॉक्टर बीमार हो चुके हैं, जबकि एक बच्चे की मौत हो गई है. खांसी की दवा बनाने वाली कंपनी की ये मेडिसन ब्लैकलिस्ट हो चुकी है, फिर भी सरकारी अस्पतालों में इसकी सप्लाई हो रही है. दवा बनाने वाली कंपनी केसन फार्मा का मालिक फैक्ट्री में ताला लगाकर चला गया है.
अगर आपके बच्चे को डेक्स्ट्रोमेथॉरफन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप खांसी के लिए कोई दे रहा है, तो रुक जाइए. क्योंकि राजस्थान के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त में बंटने वाले इसी सिरप की वजह से दावा है कि भरतपुर में 4 साल के गगन की तबीयत बिगड़ गई. गगन को दी गई दवा जब खुद डॉक्टर ने पी तो उनकी हालत भी बिगड़ गई. ये वो दवा है जो राजस्थान के सरकारी हेल्थ सेंटर पर बंट रही है. दावा है कि इसी दवा क वजह से सीकर में 5 साल के नित्यांश की जान चली गई और जयपुर में इसी कफ सिरप को सरकारी केंद्र से लेकर पीने पर 2 साल की बच्ची की जान पर बन आई.
ऐसे में सवाल ये है कि राजस्थान के सरकारी केंद्रों पर क्या बच्चों की जिंदगी पर खतरा बन रहा कफ सिरप बंटता आ रहा है? जिसकी वजह से भरतपुर, सीकर से लेकर जयपुर तक बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ रही है.
आम आदमी से जुड़ी ये वो खबर है, जिस पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि सरकारें यही तो कहती हैं कि जनता को मुफ्त इलाज सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर मुफ्त दवा के साथ दिया जा लेकिन जब वही मुफ्त दवा जनता के कलेजे के टुकड़े की जिंदगी को लीलने लगे, तो जरूरी है कि खबरदार किया जाए.
भरतपुर के बयाना ब्लॉक स्थित सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से 4 साल के गगन को खांसी के इलाज के नाम पर डेक्सट्रोमेथॉरफन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप दिया गया था, लेकिन जिस सरकारी हेल्थ सेंटर पर सरकार लिखवाती है कि आरोग्यमं परम धनम. दावा है कि वहीं से दिए गए कफ सिरप को पीकर मासूम गगन की तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ गया. सिरप पीने के बाद बच्चे को बेहोशी सा गई और उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी. है कि परिवार वालों की शिकायत पर जब उसी सिरप को खुद सामुदायिक स्वास्थ्य प्रभारी डॉ. ताराचंद योगी ने पिया तो उनकी भी तबीयत भी खराब हो गई.
ये सवाल उठ रहे
अब सवाल है कि जांच तो कर लेंगे, लेकिन पहले क्या कोई जांच नहीं की गई? राजस्थान सरकार कहती है कि मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत हर दवा की जांच राजस्थान चिकित्सा सेवा निगम की तरफ से होती है. सरकार ये भी कहती है कि जून 2024 से ये दवा मुफ्त बांटी जा रही है और कोई शिकायत नहीं मिली.
जो बात स्वास्थ्य विभाग नहीं बताता है की, वो हम बताते हैं. ये दवा के. संस फार्मा नाम की कंपनी की तरफ से बनाकर राजस्थान में सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर दी जा रही है. 5 अक्टूबर 2023 व राजस्थान का ही सरकारी कागज कहता है इसी के संस फार्मा की बनाई खांसी की दवा
लेकर दूसरी दवा गुणवत्ता के पैमाने पर खरी नहीं उतरती हैं. ये सरकारी दस्तावेज कहता है कि इस कंपनी की इन दवाओं का इस्तेमाल ना हो, लेकिन वही के. संस फार्मा जब दूसरे नाम से कफ सिरप बनाती है तो फिर से राजस्थान में टेंडर हासिल कर लेती है और इसकी बनाई हुई दवा राजस्थान के हेल्थ सेंटर में बंटने लगती है. जिससे अब 3 जगह पर एक बच्चे की मौत और 2 बच्चों की तबीयत खराब होने का दावा सामने आया है.