भाजपा का चंद्रपुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक (सीडीसीसी) पर कब्जा, रवींद्र शिंदे बने अध्यक्ष, संजय डोंगरे उपाध्यक्ष
चंद्रपुर महाराष्ट्र
रिपोर्टर:- नर्सिंग बोल्लम रिड पब्लिक न्यूज़ भारत मिडिया नेटवर्क
चंद्रपुर, 23 जुलाई 2025
पूरी खबर:-चंद्रपुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के सात दशकों के इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत के साथ एकतरफा सत्ता हासिल की है। इस चुनाव में रवींद्र शिंदे को अध्यक्ष और संजय डोंगरे को उपाध्यक्ष पद पर निर्विरोध चुना गया। इस ऐतिहासिक जीत की चर्चा राजनीतिक और सहकारी क्षेत्र में तेज़ी से हो रही है।
भाजपा नेताओं ने इस विजय को “राज्य में देवेंद्र, और बैंक में रवींद्र” जैसे नारे से संबोधित करते हुए कहा कि अब यह बैंक किसानों, गरीबों और स्वयं सहायता समूहों के लिए ज्यादा सक्रियता से कार्य करेगी।
जिला बैंक में कुल 17 निदेशकों का समर्थन भाजपा समर्थित गुट को प्राप्त हुआ था, जिससे पहले ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि चुनाव निर्विरोध होगा। मंगलवार को बैंक के सभागृह में सुबह 11 बजे निर्वाचन अधिकारी ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए बैठक बुलाई, जिसमें केवल भाजपा गुट से रवींद्र शिंदे (अध्यक्ष पद) और संजय डोंगरे (उपाध्यक्ष पद) ने नामांकन दाखिल किया। विरोधी गुट की ओर से कोई नामांकन दाखिल नहीं हुआ, जिससे दोनों पदों पर निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा की गई।
भाजपा कार्यकर्ताओं का जश्न
निर्वाचन प्रक्रिया के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने बैंक परिसर के बाहर आतिशबाज़ी कर खुशियाँ मनाईं। नव-निर्वाचित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और निदेशकों का सम्मान समारोह कन्नमवार सभागृह में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष हंसराज अहीर ने की। इस अवसर पर विधायक कीर्तिकुमार भांगडिया, विधायक किशोर जोरगेवार, विधायक करण देवतळे, पूर्व मंत्री रमेशकुमार गजभे, पूर्व विधायक सुदर्शन निमकर, पूर्व विधायक संजय धोटे और भाजपा महानगराध्यक्ष सुभाष कासनगोट्टुवार सहित कई गणमान्य नेता उपस्थित थे।
कांग्रेस का छुपा समर्थन उजागर
इस चुनाव में भाजपा को कांग्रेस के कुछ निदेशकों का गुप्त समर्थन पहले से ही प्राप्त था, जो निर्विरोध चुनाव में स्पष्ट हो गया। विशेष बात यह रही कि कांग्रेस की सांसद प्रतिभा धानोरकर चुनाव और समारोह दोनों से अनुपस्थित रहीं। हालांकि कांग्रेस के कुछ निदेशक आ. भांगडिया के कक्ष में जाकर उन्हें सम्मानित करते हुए रवींद्र शिंदे के नेतृत्व को समर्थन देने का संकेत दे चुके हैं।
सांसद मैडम का सपना टूटा
चुनाव पूर्व कांग्रेस का दावा था कि उनके पास 12 निदेशक हैं और भाजपा के पास केवल 9। इसी आधार पर सांसद प्रतिभा धानोरकर ने अध्यक्ष पद की उम्मीद जताई थी। लेकिन रवींद्र शिंदे के महाविकास आघाड़ी से बाहर निकलते ही यह समीकरण बदल गया और उनके अध्यक्ष बनने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सांसद मैडम का सपना अधूरा रह गया।
क्या एसआईटी जांच थमेगी?
कुछ महीने पूर्व बैंक में हुई नियुक्तियों को लेकर बड़े घोटाले के आरोप लगे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने 8 जुलाई को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। लेकिन अब जब राज्य, देश और बैंक तीनों पर भाजपा की सत्ता है, तो यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि क्या यह जांच अब धीमी या बंद हो जाएगी? इसको लेकर उम्मीदवारों और नागरिकों में चिंता बनी हुई है।


