जिला सामान्य अस्पताल में विश्व ग्लूकोमा सप्ताह
रिपोर्टर:- नरसिंग बोल्लम रीड पब्लिक न्यूज भारत मिडिया नेटवर्क
चंद्रपुर, जिला. 18 मार्च: जिला सामान्य अस्पताल में
विश्व ग्लूकोमा सप्ताह जिला सर्जन डाॅ. यह महादेव चिंचोले के मार्गदर्शन में मनाया गया। इस अवसर पर अतिरिक्त जिला शल्य चिकित्सक डॉ. भास्कर सोनारकर, जिला नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ. तारा सिंह अडे, नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ. उल्हास सरोदे, डॉ. जिनी पटेल, नोडल अधिकारी विवेक मसराम, जिला कार्यक्रम प्रबंधक डाॅ. बोरकर, डॉ. सावलीकर नर्स मंदा बोरकर सहित एनसीडी कार्यक्रम एवं नेत्र विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी, नर्सिंग स्कूल के विद्यार्थी एवं मरीज उपस्थित थे।
इस समय डाॅ. चिंचोले ने कहा, ग्लूकोमा एक गुप्त नेत्र रोग है। इस बीमारी में मरीजों को पता ही नहीं चलता कि उन्हें यह बीमारी है। क्योंकि मरीजों को सामने की दृष्टि तो सामान्य होती है, लेकिन बगल की दृष्टि कम होती जाती है। इसलिए, यदि आपके परिवार या दोस्तों में ऐसे मरीज मिलते हैं, तो आप उन्हें नेत्र विशेषज्ञ को दिखाकर उनकी आंखों की रोशनी बचा सकते हैं।
परिचय में नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ. सरोदे ने कहा, हर 100 लोगों में से पांच से छह मरीज मोतियाबिंद के कारण अंधे हो जाते हैं। इस रोग में आंख के बीच में विट्रियस नामक द्रव की मात्रा अधिक होने पर आंख में दबाव बढ़ जाता है और आंख में दर्द होने लगता है। बढ़ा हुआ दबाव ऑप्टिक तंत्रिका को नुकसान पहुंचा सकता है। ग्लूकोमा के लक्षणों को शुरुआत में पहचानना मुश्किल हो सकता है। इसलिए आंखों की नियमित जांच जरूरी है। कच बिंदु के शुरुआती चरण में आंखों में दर्द की समस्या महसूस होगी
नहीं कर सकता लेकिन समय के साथ यह विशेष रूप से पार्श्व दृष्टि की हानि दिखाई दे सकती है, सामने का पीला रंग ग्लूकोमा का संकेत हो सकता है। खासकर जो लोग बीपी शुगर और सिरदर्द से पीड़ित हैं और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को ग्लूकोमा का खतरा अधिक हो सकता है।
अतिरिक्त सर्जन डाॅ. सोनारकर ने कहा, ग्लूकोमा के बारे में समाज में जागरूकता पैदा करना जरूरी है। यदि ऐसे मरीज मिलते हैं तो उन्हें इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में भेजा जाए। जिससे मरीजों की आंखों की रोशनी बचाई जा सके।
कार्यक्रम का संचालन नेत्रदान परामर्शदाता योगेन्द्र इंदुरकर ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन नोडल अधिकारी विवेक मसराम ने किया।


