Friday, April 17, 2026
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वनहक्क समिती सदस्यांना बांबु व्यवस्थापनाचे धडे

वनहक्क समिती सदस्यांना बांबु व्यवस्थापनाचे धडे

रिपोर्टर:- नरसिंग बोल्लम रीड पब्लिक न्यूज भारत मिडिया नेटवर्क

चंद्रपूर, दि. 7 मार्च : वनहक्क कायदा – 2006 अंतर्गत सामुहिक दावे मंजूर झालेल्या चंद्रपूर व गडचिरोली जिल्ह्यातील क्रियाशील वनहक्क समिती सदस्याना ‘सामुहिक वनहक्क उपजीविकेसाठी बांबूचा वापर आणि सी. एफ. आर. भागात ग्रामपंचायतीच्या जबाबदाऱ्या’ या विषयावर तीन दिवसीय प्रशिक्षण बांबू संशोधन व प्रशिक्षण केंद्र चिचपल्ली यांच्यातर्फे वन अकादमी येथे आयोजित करण्यात आले आहे.

अप्पर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (संशोधन, शिक्षण व प्रशिक्षण) तथा वन अकादमीचे संचालक एम. एस. रेड्डी यांच्या संकल्पनेतून हे प्रशिक्षण 10 टप्यात आयोजित केले आहे. ज्यातून चंद्रपूर व गडचिरोली मधील विविध क्रियाशील वनहक्क समितीच्या 300 सदस्यांना या प्रशिक्षणाचा लाभ देण्यात येणार आहे. सदर प्रशिक्षणाचे एकूण तीन टप्पे पूर्ण झाले असून चौथा टप्पा नुकताच वन अकादमीमध्ये पार पडला.

यात नागभीड तालुक्यातील खडकी, येनोली, कोदेपार, देवपायली, सोनुली (खुर्द) व ब्रम्हपुरी तालुक्यातील खेडमक्ता, मेंडकी, शिवसागर तुकूम, कळमगाव, मालडोंगरी, रामपुरी, नवेगाव, जवराबोडी (मेंढा) अशा 13 क्रियाशील वनहक्क समितीतील 25 सदस्यांना हे प्रशिक्षण देण्यात आले. बांबू क्षेत्राचे व्यवस्थापन व बांबू क्षेत्राला चालना देणारे एक मोठे भागधारक म्हणून या वनहक्क समित्या आहेत. वनहक्क कायदा, ग्रामसभेच्या जबाबदाऱ्या व उत्तरदायित्व, बांबू लागवड त्याचे व्यवस्थापन, बांबूचे निष्कासन – विक्री आगार व्यवस्थापन, बांबूचा मूल्यवर्धित उपयोग इ. महत्वाच्या विषयावर विविध तज्ज्ञ मार्गदर्शकांमार्फत हे प्रशिक्षण देण्यात आले.

 

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कांग्रेस पार्टी को मूल नेतृत्व गुजरात ने दिया, जिसने हमें सोचने, लड़ने और जीने का तरीका सिखाया। गांधीजी के बिना कांग्रेस पार्टी देश को आज़ादी नहीं दिलवा पाती, और गुजरात के बिना गांधी जी नहीं होते। उनके एक कदम पीछे, गुजरात ने हमें सरदार पटेल जी को दिया। आज वही गुजरात रास्ता ढूंढ रहा है। यहां के छोटे व्यापारी, उद्यमी, किसान – सब संकट में हैं। डायमंड, टेक्सटाइल और सिरेमिक इंडस्ट्रीज बर्बाद हो रही हैं। गुजरात के लोग कह रहे हैं कि हमें नया विज़न चाहिए, क्योंकि जो विज़न पिछले 20-25 साल से चल रहा है, वह पूरी तरह फेल हो चुका है। गुजरात नया विकल्प चाह रहा है, लेकिन कांग्रेस पार्टी उसे दिशा नहीं दिखा पा रही है। यह सच्चाई है, और इसे कहने में मुझे कोई शर्म या डर नहीं है। हमें कांग्रेस की उसी विचारधारा पर लौटना होगा, जो गुजरात की विचारधारा है – जो गांधी जी और सरदार पटेल जी ने हमें सिखाई थी। हमें जनता के बीच जाना होगा, उनकी बातें सुननी होंगी। हमें दिखाना होगा कि हम सिर्फ नारे लगाने नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं का समाधान ढूंढने आए हैं। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से हमने साबित किया कि कांग्रेस आसानी से जनता से जुड़ सकती है। जैसे ही हम यह बदलाव लाएंगे और अपने कर्तव्यों को निभाने लगेंगे, गुजरात के लोग हमारे साथ खड़े हो जाएंगे।

संपादक

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