राजुरा पुल हादसे को एक साल बीता, पर कार्रवाई ज़ीरो!
घटिया निर्माण, बढ़ते हादसे और प्रशासन की चुप्पी पर जनता में उबाल
पूरी खबर:- चंद्रपुर/राजुरा —26 नवंबर 2024 को वर्धा नदी पर निर्माणाधीन पुल का एक पिलर गिरने से कई मजदूर घायल हुए थे। उस समय प्रशासन ने जांच के आदेश दिए, पर आज एक साल गुजर चुका है और न तो रिपोर्ट आई, न किसी अधिकारी या ठेकेदार पर कार्रवाई हुई।
अब नागरिकों का कहना है कि “सभी मिले हुए हैं, तभी तो कोई जवाबदेही तय नहीं हुई।”
घटना के बाद भी जीआर इंफ्रा कंपनी का घटिया काम जारी है।
राजुरा–गढ़चांदूर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जगह-जगह कीचड़, गड्ढे और अधूरे हिस्से आज भी यात्रियों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं।
पुल के नीचे गिरी सीमेंट और रेत के टुकड़े अब भी इस बात की गवाही दे रहे हैं कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग हुआ था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “दो साल से निर्माण चल रहा है, पर सड़क मौत का जाल बन चुकी है।”
लोगों ने बताया कि निर्माण स्थलों पर कोई सुरक्षा अवरोधक नहीं, न बोर्ड, न रोशनी।
रात में भारी वाहनों के बीच दोपहिया चालक अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करते हैं।
पिछले एक वर्ष में कई छोटे-बड़े हादसे हुए, जिनमें कई लोगों ने अपनी जान गंवाई,
पर न कोई अधिकारी मौके पर पहुंचता है, न प्रशासन कोई जवाब देता है।
कपाणगांव के पास हुए ट्रक–ऑटो हादसे में छह लोगों की मौत के बाद भी सिस्टम नहीं जागा।
लोगों का कहना है कि अगर वर्धा पुल हादसे की जांच समय पर होती, तो शायद कई जानें बच जातीं।
अब जनता का गुस्सा फूट पड़ा है।
नागरिकों ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और लोकनिर्माण मंत्री से इस मामले की
उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जनता का कहना है कि
“विकास के नाम पर लापरवाही नहीं चलेगी — अब भ्रष्टाचार को जवाब देना होगा।”
राजुरा थानेदार योगेश्वर पारधी ने पहले कहा था कि घटना की जांच की जाएगी और कंपनी से जवाब मांगा जाएगा,
लेकिन अब तक कोई रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “सरकार बदल गई, अधिकारी बदल गए, पर व्यवस्था वही पुरानी — सुस्त और समझौते वाली।”
लोगों का अब साफ कहना है —
“अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो सड़क पर उतरकर आंदोलन होगा।
जनता मर रही है, पर राजमार्ग पर अब भी राजनीति चल रही है।”


