नदी के रेती घाट पर मजदूरों पर वासु ठाकरे का हिंसक हमला, भद्रावती पुलिस थाने में दर्ज हुई शिकायत, मजदूरों में दहशत
चंद्रपुर/महाराष्ट्र
रिपोर्टर:- रमाकांत यादव रिड पब्लिक न्यूज़ भारत मिडिया नेटवर्क
दिनांक:- ११ सेप्टेंबर २०२५
पूरी खबर:-चंद्रपुर भद्रावती तालुका के पिपरी (देशमुख) क्षेत्र में वर्धा नदी किनारे शासन द्वारा अनुमति प्राप्त रेती घाट पर मंगलवार की शाम मजदूरों पर हुए हमले ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। नंदोरी निवासी मजदूर अंकुश हरीदास झाडे (35) ने भद्रावती पुलिस थाने में दर्ज शिकायत में बताया कि वासुदेव ठाकरे उर्फ वासु और उसके तीन साथियों ने अचानक लाल रंग की थार गाड़ी से वहां पहुंचकर मजदूरों को अपशब्द कहे, गालियां दीं और उन्हें धमकाने का प्रयास किया। इस दौरान वासु ने झाडे का कॉलर पकड़कर उनके पुराने घाव वाले पैर पर लात मारी, जिससे उनकी चोट और गंभीर हो गई।
घटना उस समय हुई जब मजदूर अपने लिए बनाए गए पत्राशेड में भोजन कर रहे थे। यह रेती घाट गितेश सातपुते ने दो वर्षों के लिए शासन से लिलाव पर लिया है और मजदूरों के साथ वहां शुभम चांभारे भी काम देख रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि वासु ठाकरे ने गितेश सातपुते और शुभम चांभारे को खोजते हुए गालियां दीं और पूरी तरह डराने-धमकाने का माहौल बना दिया। मजदूरों ने आरोप लगाया कि इस घटना से उनका काम प्रभावित हुआ है और अब वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
इस हमले के बाद मजदूरों और स्थानीय रहवासियों में दहशत का माहौल है। उनका कहना है कि वासु ठाकरे की लगातार धमकियों से उनकी रोज़ी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है और कार्यस्थल असुरक्षित बन गया है। अंकुश झाडे ने मांग की है कि इस घटना की सख्त जांच कर दोषियों को कठोर दंड दिया जाए। वहीं स्थानीय निवासियों ने भी कहा कि यह केवल मजदूरों की सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे इलाके की शांति और कानून-व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है।
भद्रावती पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गितेश सातपुते और शुभम चांभारे को जांच के लिए थाने में उपस्थित रहने का आदेश दिया है। दोनों ने पुलिस को आश्वासन दिया है कि वे अगले दिन जांच में सहयोग करेंगे। ग्रामीणों और मजदूरों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई हो, ताकि मजदूरों का भरोसा प्रशासन पर कायम रहे और इलाके में शांति बहाल हो सके।
यह प्रकरण मजदूरों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। असामाजिक तत्वों की ऐसी हरकतों के खिलाफ सख्त प्रतिक्रिया और कानूनी कार्रवाई जरूरी है, क्योंकि जब तक कानून का भय स्थापित नहीं होगा, तब तक मजदूर भय के साए में ही काम करते रहेंगे।


