Sunday, June 14, 2026
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सीपी राधाकृष्णन 12 सितंबर को ले सकते हैं उपराष्ट्रपति पद की शपथ, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दिलाएंगी शपथ रिपोर्टर:- नरसिंग बी बोल्लम रिड पब्लिक न्यूज 24 भारत मिडिया नेटवर्क

 

सीपी राधाकृष्णन 12 सितंबर को ले सकते हैं उपराष्ट्रपति पद की शपथ, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दिलाएंगी शपथ

रिपोर्टर:- नरसिंग बी बोल्लम रिड पब्लिक न्यूज 24 भारत मिडिया नेटवर्क

दिनांक:- 10 सितंबर 2025

सीपी राधाकृष्णन देश के 15वें उपराष्ट्रपति बन गए हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 12 सितंबर को उन्हें उपराष्ट्रपति पद की शपथ दिलाएंगी. मंगलवार को NDA उम्मीदवार राधाकृष्णन ने विपक्ष के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों से हराया.
सीपी राधाकृष्णन देश के 15वें उपराष्ट्रपति चुन लिए गए हैं. अब उनके कुर्सी पर बैठने की तारीख भी सामने आ गई है. सूत्रों के मुताबिक, सीपी राधाकृष्णन 12 सितंबर को उपराष्ट्रपति पद की शपथ ले सकते हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगी. राधाकृष्णन अभी महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं और उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार थे.

मंगलवार को उपराष्ट्रपति चुनाव में सीपी राधाकृष्णन (67 साल) ने इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों से हराया था. चुनाव में 788 सदस्यों में से 767 ने मतदान किया था राधाकृष्णन को उम्मीद से ज्यादा 452 वोट थे. जबकि सुदर्शन रेड्डी को सिर्फ 300 वोट मिले. चुनाव में राधाकृष्णन को भारी मतों से जीत मिली.
इस जीत के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की और उन्हें उपराष्ट्रपति बनने पर बधाई दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन से मिले. यह मुलाकात केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी के निवास स्थान पर हुई.
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी अपने कार्यकाल से हटने के बाद पहली बार सार्वजनिक बयान में राधाकृष्णन को बधाई दी. उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि नए उपराष्ट्रपति की यह उपलब्धि देश के प्रतिनिधियों का विश्वास दर्शाती है.

धनखड़ ने यह भी कहा कि राधाकृष्णन के सार्वजनिक जीवन का अनुभव उपराष्ट्रपति पद को और गरिमा प्रदान करेगा.
धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारण बताते हुए अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था. 50 दिन बाद चुनाव हुआ और एनडीए ने जीत हासिल की. वोटिंग आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि विपक्ष में भी कुछ सांसदों ने क्रॉस वोटिंग की, जिससे राधाकृष्णन को बड़ी जीत मिली.

संपादक

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