Saturday, June 6, 2026
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बसपा से भाजपा में शामिल हुए सुधीर कारंगल क्या महा‍नगर पालिका चुनाव में रैयतवारी Industrial Ward का 30 साल पुराना इतिहास बदलेगा? स्थानीय राजनीति के अंदरूनी विवादों पर उठे तीखे सवाल

बसपा से भाजपा में शामिल हुए सुधीर कारंगल

क्या महा‍नगर पालिका चुनाव में रैयतवारी Industrial Ward का 30 साल पुराना इतिहास बदलेगा?
स्थानीय राजनीति के अंदरूनी विवादों पर उठे तीखे सवाल

चंद्रपुर महाराष्ट्र 
रिपोर्टर:- रमाकांत यादव रिड पब्लिक न्यूज़ भारत 
दिनांक:- १२ दिसंबर २०२५
पूरी खबर:-चंद्रपुर महा‍नगर पालिका चुनाव की आहट के साथ ही चंद्रपुर की राजनीति में बड़ा विस्फोट देखने को मिला है।
बसपा के माजी नगरसेवक सुधीर कारंगल ने भाजपा में शामिल होकर चुनावी माहौल को पूरी तरह गर्म कर दिया है।
कारंगल का भाजपा में आना सिर्फ एक दल-परिवर्तन नहीं, बल्कि रैयतवारी Industrial Ward में बने 30 साल पुराने राजनीतिक गणित को सीधे चुनौती माना जा रहा है।

30 साल से BJP का इंतज़ार—अब क्या स्थिति बदलने वाली है?

रैयतवारी Industrial Ward ऐसा वार्ड रहा है जहां भाजपा पिछले तीन दशकों से एक भी बार जीत दर्ज नहीं कर पाई
संगठन मजबूत हुआ, कार्यकर्ता बढ़े, शहर का राजनीतिक माहौल बदला—लेकिन यह वार्ड भाजपा के हाथ से हमेशा निकलता रहा।

अब जब कारंगल भाजपा में आ गए हैं, तो इस वार्ड में पार्टी पहली बार “सीधी लड़ाई” में उतरने की स्थिति में दिखाई दे रही है।

सूत्रों का बड़ा खुलासा—BJP यहां विपक्ष से नहीं, अपनी ही टीम से हारती रही

स्थानीय सूत्रों ने चौंकाने वाला दावा किया है कि रैयतवारी Industrial Ward में भाजपा की हार का असली कारण विपक्ष की ताकत नहीं,
बल्कि भाजपा के ही कुछ स्थानीय कार्यकर्ता और पदाधिकारी रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार—

  • “यहां के कुछ पदाधिकारी सिर्फ बड़े नेताओं का नाम लेकर राजनीति करते रहे, खुद कोई काम नहीं किया।”
  • “इन लोगों ने किसी भी नए या सक्षम व्यक्ति को आगे आने ही नहीं दिया।”
  • “साधारण कार्यकर्ता से लेकर संभावित उम्मीदवार तक — किसी से ठीक से बात तक नहीं करते थे।”
  • “अपनी अलग लॉबी चलाकर यहां भाजपा के विकास को रोकते रहे।”

सूत्रों का कहना है कि यही कारण रहा कि भाजपा 30 साल में एक भी बार जीत की दहलीज पार नहीं कर सकी।

कारंगल का प्रभाव—स्थानीय राजनीति का संतुलन बदल सकता है

सुधीर कारंगल पहले से ही सुधीर मुनगंटीवार और हंसराज अहीर जैसे दिग्गज नेताओं के करीबी माने जाते हैं।
उनकी क्षेत्र में पकड़ बेहद मजबूत है — चाहे सामाजिक संपर्क हों, जनता से रिश्ते हों या राजनीतिक पहचान।

सूत्रों का कहना है:

“यहां के कुछ स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता सिर्फ दिग्गज नेताओं की छाया में दिग्गज बनने का दिखावा करते रहे,
न खुद काम किया न किसी को करने दिया।
कारंगल के आने से यह पुरानी कार्यपद्धति टूटेगी।”

वार्ड में नया मूड—इस बार मामला गर्म है

अब रैयतवारी Industrial Ward में चर्चा सिर्फ एक ही बात की है —
सुधीर कारंगल का भाजपा में प्रवेश क्या भाजपा को पहली बार जीत दिला सकता है?

कारंगल का नाम, उनकी पहचान, और उनकी पहुंच इस वार्ड में लंबे समय से प्रभावशाली रही है।
उनके बीजेपी में आने से पूरे वार्ड में उत्सुकता और राजनीतिक हलचल दोनों बढ़ चुकी हैं।

अब सभी की नजरें एक ही सवाल पर

  • क्या कारंगल भाजपा की 30 साल से सूखी किस्मत को बदल पाएंगे?
  • क्या इस बार रैयतवारी Industrial Ward इतिहास लिखेगा?
  • क्या भाजपा की अंदरूनी लॉबी खत्म होकर मजबूत उम्मीदवार सामने आ पाएगा?

महा‍नगर पालिका चुनाव में यह वार्ड चंद्रपुर की सबसे बड़ी राजनीतिक जमीन बनने जा रहा है।
अगले कुछ दिनों में यहां की हवा किस ओर बहती है, यह शहर भर की नजरों में रहेगा।

संपादक

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