बिहार में फर्जी वोटर लिस्ट पर बड़ा सवाल, 68 लाख संदिग्ध नामों ने उठाई चुनाव नतीजों पर शंका
बिहार की मतदाता सूची को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि करीब 68 लाख फर्जी वोटर लिस्ट से नहीं हटाए गए होते तो हाल के विधानसभा चुनावों का परिणाम कुछ और हो सकता था। इस मुद्दे को लेकर जनहित याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय के समर्थकों ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा बताया है।
सोशल मीडिया पर यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है, जहां दावा किया जा रहा है कि फर्जी नामों ने वास्तविक मतगणना पर असर डाला। इसके चलते मतदाता सूची के व्यापक सत्यापन और सुधार की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। समर्थकों का कहना है कि यदि फर्जी मतदाताओं को समय रहते हटाया जाता, तो चुनावी नतीजे अधिक पारदर्शी और सटीक होते।
मामले को लेकर चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग बढ़ रही है। जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक विश्लेषकों ने भी कहा है कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण नींव है और इस तरह अवैध या संदिग्ध मतदाताओं का मौजूद रहना पूरे चुनावी ढांचे के लिए चुनौती है।
अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई जारी है और अब सभी की नजरें अदालत और चुनाव आयोग की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।


