सरदार पटेल महाविद्यालय चंद्रपुर में पीएम ऊषा योजना के तहत ‘रंगमंच और भाषा कौशल्य’ पर सर्टिफिकेट कोर्स संपन्न
रिपोर्टर:- नरसिंग बी बोल्लम रिड पब्लिक न्यूज 24 भारत मिडिया नेटवर्क
दिनांक:- 21 अगस्त 2025
चंद्रपुर, अगस्त 2025: सरदार पटेल महाविद्यालय, चंद्रपुर के हिंदी विभाग द्वारा पीएम ऊषा योजना के अंतर्गत जागरूकता प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम के तहत ‘रंगमंच और भाषा कौशल्य’ विषय पर 21 जुलाई से 26 जुलाई 2025 तक सर्टिफिकेट कोर्स का आयोजन किया गया। इस कोर्स में बी.ए., बी.कॉम., बी.एससी., और एम.ए. हिंदी के 25 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और थिएटर व भाषा कौशल का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया। कार्यक्रम में प्रख्यात वक्ताओं श्री डॉ. अनिरुद्ध वनकर, श्री विप्लव शिंदे, प्रा. सुमेधा श्रीरामे और श्री जगदीश नंदूरकर ने अपनी विशेषज्ञता से विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत हिंदी विभाग की प्राध्यापिका डॉ. सुनीता बनसोड ने प्रस्तावना के साथ की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा, “थिएटर और भाषा कौशल न केवल मंचीय प्रस्तुति को प्रभावी बनाते हैं, बल्कि व्यक्तित्व विकास और आत्मविश्वास को भी बढ़ावा देते हैं। यह कोर्स विद्यार्थियों के लिए एक अनमोल अवसर है, जो उन्हें संचार और नेतृत्व में निपुण बनाएगा।”
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पी. एम. काटकर ने अपने उद्बोधन में कहा, “पीएम ऊषा योजना के अंतर्गत आयोजित यह सर्टिफिकेट कोर्स हमारे विद्यार्थियों के लिए बहुआयामी अवसर लेकर आया है। थिएटर और भाषा कौशल न केवल अकादमिक विकास में सहायक हैं, बल्कि यह उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं। संस्थान सदैव विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करता रहेगा।”
श्री अनिरुद्ध वनकर ने अपने सत्र में थिएटर की कला को अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने कहा, “थिएटर एक ऐसा मंच है, जो भावनाओं, विचारों और कहानियों को जीवंत करता है। इसके लिए भावनात्मक गहराई, स्वर नियंत्रण और दर्शकों के साथ तालमेल आवश्यक है।” उन्होंने विद्यार्थियों को थिएटर में चरित्र निर्माण और संवाद अदायगी की बारीकियां सिखाईं।
श्री विप्लव शिंदे ने भाषा कौशल के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति और भावनाओं का वाहक है। थिएटर में भाषा का सही उपयोग दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ता है।” उन्होंने हिंदी भाषा की समृद्धि और मंच पर उसकी प्रभावशीलता को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को उच्चारण और शब्द चयन के गुर सिखाए।
प्रा. सुमेधा श्रीरामे ने थिएटर में रचनात्मकता और सहजता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “थिएटर कलाकार को अपने किरदार में डूबना पड़ता है, लेकिन साथ ही दर्शकों के साथ जीवंत संबंध बनाए रखना होता है। यह एक संतुलन की कला है।” उन्होंने विद्यार्थियों को मंच पर भाव-भंगिमा और हाव-भाव के उपयोग की तकनीकें सिखाईं। उन्होंने थिएटर और भाषा कौशल को व्यक्तित्व विकास का आधार बताते हुए विद्यार्थियों को मंचीय भय से निपटने और प्रभावी प्रस्तुति के लिए व्यावहारिक अभ्यास कराए।
श्री जगदीश नंदूरकर ने थिएटर के सामाजिक प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “थिएटर समाज का दर्पण है, जो सामाजिक मुद्दों को उठाने और जागरूकता फैलाने का काम करता है। एक अच्छा कलाकार अपनी कला के माध्यम से समाज को प्रेरित कर सकता है।” उन्होंने विद्यार्थियों को थिएटर में सामाजिक संदेशों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की तकनीकें सिखाईं।
संस्था के अध्यक्ष श्री नामदेवराव पोरेड्डीवार ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा, “विद्यार्थियों के कौशल और आत्मविश्वास के विकास हेतु यह प्रयास अत्यंत प्रशंसनीय है। थिएटर और भाषा कौशल की शिक्षा उन्हें न केवल अकादमिक रूप से, बल्कि सामाजिक एवं व्यावसायिक जीवन में भी उत्कृष्ट बनाएगी। संस्थान ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को समयानुकूल और व्यवहारिक शिक्षा देने के लिए हमेशा तत्पर रहेगा।”
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. शैलेन्द्र कुमार शुक्ल ने आभार प्रदर्शन करते हुए सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों और आयोजन समिति के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा, “यह कोर्स विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणादायी अनुभव रहा, जिसने उनके भाषा और मंचीय कौशल को नई दिशा दी।”
आयोजन की सफलता में प्राध्यापिकाओं प्रा. रीता पाठक, प्रा. प्रणिता गडकरी, प्रा. माधुरी कटकोजवार, प्रा. अश्विनी शाकीनाला और शैलजा ठमके का सक्रिय सहयोग उल्लेखनीय रहा। इनके प्रयासों से कार्यक्रम का सुचारू संचालन और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन संभव हुआ।
प्रतिभागी विद्यार्थियों ने इस कोर्स को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें थिएटर और भाषा कौशल की तकनीकों के साथ-साथ आत्मविश्वास और नेतृत्व कौशल में भी वृद्धि हुई। समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए।
यह कोर्स पीएम ऊषा योजना के तहत शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। विद्यार्थियों और प्राध्यापकों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे भविष्य में भी जारी रखने की मांग की।