केंद्र सरकार की पीएम ऊषा योजना अंतर्गत सरदार पटेल महाविद्यालय में आयोजन
‘रंगमंच और भाषा कौशल’ प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम का तीसरे और चौथे दिन सफल आयोजन
चंद्रपुर महाराष्ट्र
दिनांक:- १० जनवरी २०२५
रिपोर्टर:- नर्सिंग बोल्लम उपसंपादक रिड पब्लिक न्यूज़ मिडिया नेटवर्क
पूरी खबर:-चंद्रपुर सरदार पटेल महाविद्यालय के हिंदी विभाग ने केंद्र सरकार की पीएम ऊषा योजना के तहत ‘रंगमंच और भाषा कौशल’ विषय पर 9 और 10 जनवरी 2025 को प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम का आयोजन किया। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में रंगमंचीय कौशल और भाषा के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम की शुरुआत हिंदी विभाग प्रमुख डॉ. सुनीता बनसोड के प्रस्ताविक भाषण से हुई। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा, “रंगमंच एक ऐसा माध्यम है, जो भाषा और अभिव्यक्ति को सशक्त करता है। यह न केवल अभिनय का कौशल सिखाता है, बल्कि संवाद की गहराई और प्रस्तुति को भी बेहतर बनाता है। आज के युग में, छात्रों के लिए मंचीय आत्मविश्वास और प्रभावी संवाद कौशल बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य यही है कि विद्यार्थियों को रंगमंचीय तकनीकों के माध्यम से उनकी भाषा और व्यक्तित्व को निखारने का अवसर मिले।” उन्होंने यह भी बताया कि रंगमंच केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि यह छात्रों को अनुशासन, टीमवर्क और भावनात्मक अभिव्यक्ति का पाठ पढ़ाता है।
बकार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के उप प्राचार्य डॉ. स्वप्निल माधमशेट्टीवार ने की। अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने हिंदी विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को संवाद कौशल और व्यक्तित्व विकास के लिए प्रेरित करेगा।
प्रमुख वक्ता और अतिथि, प्रसिद्ध नाट्य अभिनेत्री एवं शिक्षिका सौ. नूतन अजय धवने ने करीब 35 से अधिक विद्यार्थियों को नाट्य कला का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने संवाद कौशल और अभिनय की विविध तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा, “रंगमंच केवल अभिनय का माध्यम नहीं है, यह एक ऐसा मंच है जो आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास को मजबूती प्रदान करता है। संवाद में ठहराव, भावों की प्रस्तुति और शब्दों की गूंज दर्शकों पर गहरा प्रभाव डालती है।”
प्रमुख वक्ता का परिचय प्रा रीता पाठक ने एवं कार्यक्रम के समापन पर हिंदी विभाग के प्रोफ़ेसर डॉ. शैलेन्द्र कुमार शुक्ल ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “यह पाठ्यक्रम हमारे छात्रों के लिए एक अनमोल अवसर है। रंगमंच भाषा का जीवंत स्वरूप है, जो केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहता बल्कि हावभाव, ध्वनि और मंचीय प्रस्तुति का समग्र रूप है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को न केवल रंगमंच की तकनीकों को समझने का मौका मिला, बल्कि संवाद के माध्यम से अपने व्यक्तित्व को निखारने का भी अवसर मिला। मैं विशेष रूप से सौ. नूतन धवने मैडम का आभार प्रकट करता हूं, जिन्होंने अपने अनुभव और ज्ञान से छात्रों को प्रेरित किया।” संचालन प्रा. प्रणिता गडकरी ने किया। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. पी.एम. काटकर और उप प्राचार्य डॉ. स्वप्निल माधमशेट्टीवार के मार्गदर्शन में हिंदी विभाग की प्राध्यापिकाएं प्रणिता गडकरी, पूजा सिंह, सुमेधा श्रीरामे, माधुरी कटकोजवार और छात्रों ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।
विद्यार्थियों ने इस पाठ्यक्रम को अद्भुत अनुभव बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम उनकी सोच, भाषा और आत्मविश्वास को एक नई दिशा देने वाला था।