Tuesday, September 15, 2026
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देवाड़ा खुर्द का प्राथमिक उपचार केंद्र बना सवालों के घेरे में! 

देवाड़ा खुर्द का प्राथमिक उपचार केंद्र बना सवालों के घेरे में! 

जर्जर छत के नीचे इलाज, डॉक्टर का अता-पता नहीं! ग्रामीण पूछ रहे—आखिर किसके भरोसे चल रहा है स्वास्थ्य केंद्र?

चंद्रपुर महाराष्ट्र 

रिपोर्टर:- सचिन ढ़गे रिड पब्लिक न्यूज़ भारत 

दिनांक:- १३ अगस्त २०२६

पूरी खबर:-देवाड़ा खुर्द। पोंभुर्णा तहसील के बड़े गांवों में शुमार देवाड़ा खुर्द में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी सामने आ रही है। गांव में प्राथमिक उपचार केंद्र मौजूद है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र में नियमित डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहने और इमारत की खराब हालत के कारण मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

मामला सिर्फ डॉक्टर की अनुपलब्धता तक सीमित नहीं है। प्राथमिक उपचार केंद्र की इमारत की तस्वीरें सामने आने के बाद इसकी हालत को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। छत में बड़ी-बड़ी दरारें, जगह-जगह उखड़ा हुआ सीमेंट, बारिश में पानी रिसने की समस्या और दीवारों में नमी—ये हालात मरीजों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर रहे हैं।

 

अब सवाल यह है कि जहां मरीज अपनी बीमारी का इलाज कराने पहुंचते हैं, अगर उसी इमारत की हालत सुरक्षित नहीं है तो जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

ग्रामीणों के मुताबिक, केंद्र में नियमित डॉक्टर नहीं होने के कारण सामान्य बीमारी से लेकर आपातकालीन स्थिति तक मरीजों को पोंभुर्णा, उमरी या अन्य स्थानों की ओर जाना पड़ता है। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और गंभीर मरीजों के लिए यह स्थिति परेशानी का कारण बन रही है।

 

विकास के दावों के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था का यह हाल क्यों?

सरकारी स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने की बातें लगातार होती हैं, लेकिन देवाड़ा खुर्द के ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव में स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद डॉक्टर के लिए मरीजों को बाहर जाना पड़े और जर्जर इमारत में इलाज करना पड़े, तो फिर इस व्यवस्था का फायदा आम जनता को कब मिलेगा?

ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या लंबे समय से बनी हुई है और अब प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की जा रही है।

इसी मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मनीष राऊत के नेतृत्व में ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर प्राथमिक उपचार केंद्र में स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति, जर्जर इमारत की मरम्मत अथवा नई इमारत और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

हादसे के बाद जागेगा प्रशासन या पहले होगी कार्रवाई?

ग्रामीणों की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग तत्काल मौके का निरीक्षण करे और इमारत की वास्तविक स्थिति की जांच कराए। यदि भवन मरीजों के लिए सुरक्षित नहीं है तो वैकल्पिक व्यवस्था की जाए और केंद्र में नियमित डॉक्टर की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।

क्योंकि सवाल सिर्फ टूटी छत और उखड़े सीमेंट का नहीं है…

सवाल उन मरीजों का है जो इलाज की उम्मीद लेकर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं।

सवाल उन बुजुर्गों और बच्चों का है जिन्हें समय पर डॉक्टर की जरूरत पड़ती है।

और सबसे बड़ा सवाल—

क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

अब देखना होगा कि ग्रामीणों की इस शिकायत और ज्ञापन पर स्वास्थ्य विभाग क्या कार्रवाई करता है और देवाड़ा खुर्द के लोगों को कब तक नियमित एवं सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा मिल पाती है।

 

संपादक

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