इंदौर की जांबाज़ वकील अभिजीता राठौड़ ने मौत के बाद भी दी नई ज़िंदगी — अंगदान से 8 लोगों को मिला जीवनदान
दिनांक:- ०९ नवंबर २०२५
रिपोर्टर:- रमाकांत यादव रिड पब्लिक न्यूज़ भारत
पूरी खबर:-इंदौर शहर आज एक ऐसी बेटी को सलाम कर रहा है जिसने मृत्यु के बाद भी इंसानियत की सबसे ऊँची मिसाल पेश की।
हाई कोर्ट की जानी-मानी वकील अभिजीता राठौड़ (38 वर्ष) का निधन भले ही हो गया, लेकिन उनके अंगों ने आठ लोगों को नई ज़िंदगी दे दी।
जानकारी के अनुसार, अभिजीता राठौड़ को निमोनिया के इलाज के दौरान ब्रेन हेमरेज हुआ था। डॉक्टरों ने हर संभव प्रयास किया, लेकिन जब उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया, तो परिवार ने इंसानियत की मिसाल कायम कर दी।
उनके पति प्रवीण राठौड़, माँ गिरिबाला राठौड़, और बड़े भाई अभिजीत सिंह राठौड़ ने गहरे दुख के बीच एक बड़ा फैसला लिया — अभिजीता के अंगों को दान करने का।
यह फैसला न सिर्फ साहसिक था, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा बन गया।
अभिजीता के लीवर, दोनों किडनी, दोनों कॉर्निया (आंखें) और त्वचा सहित कई अन्य अंगों को दान किया गया। इन अंगों से 8 गंभीर मरीजों को नई ज़िंदगी मिली है।
अंगों को सुरक्षित और समय पर जरूरतमंद मरीजों तक पहुँचाने के लिए इंदौर में 65वां “ग्रीन कॉरिडोर” बनाया गया, जिसमें पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर एक संवेदनशील मानवीय उदाहरण पेश किया।
उनके इस महान कार्य के सम्मान में गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। शहर ने उन्हें पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।
अभिजीता न केवल एक योग्य वकील थीं, बल्कि एक बहुमुखी प्रतिभा की धनी महिला भी थीं। उन्होंने इंजीनियरिंग के बाद एलएलबी और क्रिमिनोलॉजी में एलएलएम की डिग्री हासिल की थी।
वे अपने पीछे पति प्रवीण राठौड़, 13 साल की बेटी पर्णिका और 5 साल के बेटे अभिरत्न को छोड़ गई हैं।
इंदौर की यह घटना सिर्फ एक परिवार का दुःख नहीं, बल्कि एक प्रेरक कहानी है जो बताती है कि मृत्यु के बाद भी इंसान दूसरों के लिए जीवन बन सकता है।
अभिजीता राठौड़ का यह कदम आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है कि –
“जीवन का असली अर्थ सिर्फ जीने में नहीं, बल्कि किसी और को जीवन देने में है।”


