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आए दिन हादसे, नागरिकों में आक्रोश — जवाबदेही तय कौन करेगा? राजुरा–गढ़चांदूर राष्ट्रीय राजमार्ग पर घटिया निर्माण और सुरक्षा की अनदेखी से बढ़ रहे हादसे

आए दिन हादसे, नागरिकों में आक्रोश — जवाबदेही तय कौन करेगा?

राजुरा–गढ़चांदूर राष्ट्रीय राजमार्ग पर घटिया निर्माण और सुरक्षा की अनदेखी से बढ़ रहे हादसे

राजुरा (चंद्रपुर), 8 नवंबर 2025
 
 
रिपोर्टर:- रमाकांत यादव रिड पब्लिक न्यूज़ भारत 
 

पूरी खबर:-राजुरा शहर से गढ़चांदूर तक चल रहे राष्ट्रीय राजमार्ग और वर्धा नदी पुल के निर्माण कार्य में लापरवाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। एक साल पहले हुए पुल हादसे के बाद उम्मीद थी कि अब कार्यप्रणाली में सुधार आएगा, पर हकीकत यह है कि आज भी निर्माण स्थल पर वही पुरानी खामियां मौजूद हैं।

पुल और सड़क के आसपास आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। कहीं गड्ढों में फंसकर दोपहिया वाहन पलट रहे हैं, तो कहीं संकेतक या चेतावनी बोर्ड न होने से कार और ट्रक आपस में टकरा रहे हैं। कई बार निर्माण स्थल के पास अचानक मार्ग बदल दिए जाते हैं, जिससे अनजान वाहन चालक सीधे खतरे में पड़ जाते हैं। अब तक कई लोग इन हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई नहीं हुई।

नागरिकों का आक्रोश बढ़ा, बोले — “विकास चाहिए, जान की क़ीमत पर नहीं”

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हर दुर्घटना के बाद जांच और कार्रवाई की बात होती है, मगर कुछ दिन बाद मामला रफा-दफा कर दिया जाता है। लोगों का कहना है कि अगर वर्धा नदी पुल हादसे के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई होती, तो आज यह स्थिति नहीं बनती।

कपाणगांव के पास अगस्त में हुए ट्रक-ऑटो हादसे में छह लोगों की मौत हुई थी। स्थानीय नागरिकों ने कहा कि वह जगह भी निर्माणाधीन राजमार्ग के हिस्से में आती है, जहां मिट्टी के टीले, फिसलन और दिशा सूचक बोर्डों की कमी के कारण अक्सर टक्करें होती हैं। प्रशासन और ठेकेदारों की लापरवाही अब जनता के गुस्से का कारण बन चुकी है।

बारिश के मौसम में सड़कें दलदल में बदल जाती हैं

राजमार्ग के कई हिस्सों पर मिट्टी और सीमेंट का मिश्रण सड़क किनारे जमा है। बरसात में यह कीचड़ बन जाता है, जिससे दोपहिया वाहन फिसलकर गिर जाते हैं। वर्धा नदी पुल के पास यातायात अत्यंत खतरनाक स्थिति में है। न सुरक्षा अवरोधक हैं और न प्रकाश की व्यवस्था। रात के समय पुल पार करना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।

प्रशासन और ठेकेदारों की चुप्पी

वर्धा नदी पुल और राजमार्ग निर्माण की जिम्मेदारी जीआर इंफ्रा कंपनी के पास है। हालांकि, कंपनी के किसी अधिकारी ने अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। नागरिकों का कहना है कि कंपनी और विभाग के बीच की खामोश समझौता स्थिति सबसे बड़ी चिंता का विषय है।

स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी इस पर चुप्पी साध रखी है। जबकि हादसों में घायल और मृतक परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा में हैं।

नागरिकों की मांग – उच्चस्तरीय जांच और जवाबदेही तय की जाए

सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने राज्य सरकार से मांग की है कि पूरे राजुरा–गढ़चांदूर राजमार्ग निर्माण और वर्धा नदी पुल कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए। ठेकेदार कंपनी की कार्यप्रणाली, उपयोग की जा रही सामग्री की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक है।

लोगों का कहना है —

“हर हादसे के बाद प्रशासन जागता है, लेकिन कुछ दिन बाद सब भूल जाता है। जब तक जिम्मेदारों को सज़ा नहीं मिलेगी, तब तक ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं।”

संपादक

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