माजी सैनिक की अगुवाई में जनक्रांति – स्थानीय लोगों के हक़ में गरज उठा बेमुदत आमरण उपोषण!
रिपोर्टर:- नरसिंग बोल्लम आर पब्लिक न्यूज भारत मिडिया नेटवर्क
“जब अन्याय अपनी हदें पार कर जाए, तो संघर्ष जन्म लेता है। और जब संघर्ष की कमान एक माजी सैनिक संभाले, तो क्रांति निश्चित है!”
आज मनोज ठेंगणे – जो कि एक माजी सैनिक, सामाजिक कार्यकर्ता और देशभक्त हैं – स्थानीय लोगों के हक़, न्याय और अधिकार की लड़ाई को बुलंद आवाज़ देते हुए बेलोरा कोल माइन्स और SIS सिक्युरिटी कंपनी Pvt. Ltd. के खिलाफ बेमुदत आमरण उपोषण शुरू किया।
मनोज ठेंगणे का स्पष्ट संदेश है:
“यह उपोषण सिर्फ हमारी नहीं, बल्कि प्रकल्पग्रस्त गावों, मजदूरों, विद्यार्थियों और आनेवाली पीढ़ियों की लड़ाई है। हम शांतिपूर्वक, संविधानिक ढंग से अपना हक़ मांग रहे हैं – और अब जनता हमारे साथ है!”
हजारों ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों का आंदोलन को समर्थन!
गांव-गांव से लोग जुटे, हर दिल में एक ही आवाज़ –
“हम अन्याय सहन नहीं करेंगे!”
क्या है इस आंदोलन की आग के पीछे की चिंगारी?
स्थानिकों को काम से निकाला जा रहा है, जबकि बाहरियों को नौकरियाँ दी जा रही हैं!
माजी सैनिकों का अपमान हो रहा है – सुरक्षा सेवा छीनी जा रही है!
गांवों में पीने का पानी नहीं, अस्पताल नहीं, रास्ते खस्ताहाल – और कंपनियाँ मुनाफ़ा कमा रहीं हैं!
आंदोलन की 12 दमदार मांगें:
स्थानीय मजदूरों को स्थायी किया जाए।
मंदिर का विस्थापन पुनर्वसन के बाद हो।
माजी सैनिकों की नौकरी बहाल हो।
उन्हें समान वेतन मिले।
विस्थापित गांवों का सही पुनर्वसन हो।
अन्याय पर शासकीय लिखित आश्वासन दिया जाए।
बाहरी कर्मचारियों को हटाया जाए।
पानी की समस्या का समाधान हो।
दिखावा नहीं, असली वृक्षारोपण किया जाए।
हर गांव में मुफ्त RO योजना शुरू हो।
24 घंटे अस्पताल और एम्बुलेंस सुविधा मिले।
खराब रास्तों की मरम्मत हो।
अब यह सिर्फ़ आंदोलन नहीं, जनआंदोलन बन चुका है!
“एक सैनिक का जज़्बा जब जनता का हथियार बनता है – तब बदलाव तय होता है!”
सरकार और कंपनी से अपील है कि वे इस जनाक्रोश को समझें और जल्द से जल्द इन न्यायसंगत मांगों पर निर्णय लें – वरना यह आग और फैलेगी।